नई शिक्षा निति का ड्राफ्ट तैयार, जानिए क्या कुछ बदला नई शिक्षा निति में?

इस पॉलिसी का इंतजार करीब दो साल से हो रहा था और दो साल के इंतज़ार के बाद यह तैयार होकर मंत्रालय में आ गई है| शिक्षा जगत में सकरात्मक और बेहतर सुधार लाने के लिए इस पॉलिसी में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय भाषाओं पर किया गया है|

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New education policy

भारतीय जनता पार्टी के दुसरे कार्यकाल में सरकार द्वारा शिक्षा जगत के क्षेत्र में कुछ अहम बदलाओं लाने के प्रयास किए जा रहे है| इस बदलाव के तहत राष्ट्रीय शिक्षा निति (एनईपी) के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने सिलेबस में भारतीय शिक्षा प्रणाली को शामिल करने जैसी सिफारिशें लागू करने का ड्राफ्ट सौंप दिया| इस ड्राफ्ट में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन और निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर रोक लगाने जैसी सिफारिशें शामिल हैं|

इस पॉलिसी का इंतजार करीब दो साल से हो रहा था और दो साल के इंतज़ार के बाद यह तैयार होकर मंत्रालय में आ गई है| शिक्षा जगत में सकरात्मक और बेहतर सुधार लाने के लिए इस पॉलिसी में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय भाषाओं पर किया गया है| इसमें यह कहा गया है कि बच्चों को कम से कम क्लास पांच तक मातृभाषा में पढ़ाना चाहिए एवं साथ ही शुरू से बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं का ज्ञान देना चाहिए| अगर विदेशी भाषा भी पढ़नी है तो यह चौथी भाषा के तौर पर हो सकती है| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी शुरू से प्राइमरी की पढ़ाई मातृभाषा में ही कराने की मांग करता रहा है| संघ से संबंधित स्कूलों में ऐसा किया भी जाता है|

क्या है नई एजुकेशन पालिसी में?

नई एजुकेशन पालिसी के तहत बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कम से कम पांचवीं तक और वैसे आठवीं तक मातृभाषा में ही पढ़ाना चाहिए| प्री-स्कूल और पहली क्लास में बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं के बारे में भी पढ़ाना चाहिए जिसमें वह इन्हें बोलना सीखें और इनकी स्क्रिप्ट पहचाने और पढ़ें| तीसरी क्लास तक मातृभाषा में ही लिखें और उसके बाद दो और भारतीय भाषाएं लिखना भी शुरू करें| अगर कोई विदेशी भाषा भी पढ़ना और लिखना चाहे तो यह इन तीन भारतीय भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के तौर पर पढ़ाई जाए|

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूलने पर लगेगी रोक

प्राइवेट स्कूलों में वसूली जाने वाली मनमानी फीस से आम जनता सबसे ज्यादा परेशान है जिसकी वजह से वें अपने बच्चों का एडमिशन मनचाहे स्कूलों में नहीं कर पाते है| इस मामले पर अब एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट में प्राइवेट स्कूलों की मनमाने तरीके से फीस बढा़ने पर भी लगाम लगाने के कहा गया है| नई एजुकेशन पालिसी के तहत स्कूलों को फीस तय करने की छूट होनी चाहिए लेकिन वह एक तय लिमिट तक ही फीस बढ़ा सकते हैं| इसके लिए महंगाई दर और दूसरे फैक्टर देख यह तय करना होगा कि वह कितने पर्सेंट तक फीस बढ़ा सकते हैं| हर तीन साल में राज्यों की स्कूल रेग्युलेटरी अथॉरिटी देखेगी कि इसमें क्या-क्या बदलाव करने हैं| फीस तय करने को लेकर राष्ट्रीय बाल आयोग भी पहले गाइडलाइन बना चुका है| उसमें भी यही कहा गया है कि महंगाई दर और दूसरे जरूरी फैक्टर के आधार पर तय हो कि प्राइवेट स्कूल कितनी फीस बढ़ा सकते हैं| बाल आयोग ने तो इसका उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान भी सिफारिश की है|

पढाई का तानव हो कम

आज बच्चों में पढाई को लाकर तनाव बढ़ रहा है जिसके मद्देनज़र पालिसी ड्राफ्ट में अहम बिन्दुओं को जोड़ा गया है| पॉलिसी ड्राफ्ट में कहा गया है कि बच्चों में 10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम का तनाव कम करना चाहिए| इसके लिए उन्हें मल्टिपल टाइम एग्जाम देने का विकल्प दिया जा सकता है| स्टूडेंट को जिस सेमिस्टर में लगता है कि वह जिस विषय में एग्जाम देने के लिए तैयार है उसका उस वक्त एग्जाम लिया जा सकता है| बाद में स्टूडेंट को लगता है कि वह उस विषय में और बेहतर करता है और उसे फिर से एग्जाम देने का विकल्प दिया जाना चाहिए|

हायर एजुकेशन में पसंद के विषय चुनने की हो छूट

नई एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्ट में हायर एजुकेशन में अपने पसंद के विषय चुनने की ज्यादा छूट देने का प्रस्ताव है| इसके साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने का भी प्रस्ताव है जिसे प्रधानमंत्री हेड कर सकते हैं| साथ ही इसमें लिबरल आर्ट में चार साल की बैचलर डिग्री शुरू करने का भी प्रस्ताव है| ड्राफ्ट में कहा गया है कि ‘राइट टु एजुकेशन’ के तहत प्री प्राइमरी से लेकर 12 वीं तक सभी कवर हों| अभी यह पहली क्लास से आठवीं क्लास तक ही है| यह भी कहा गया है कि एजुकेशन पर ज्यादा फोकस करने के लिए मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाना चाहिए| सभी विषयों में भारत के योगदान को भी स्टूडेंट्स को पढ़ाना चाहिए|

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इस पॉलिसी का इंतजार करीब दो साल से हो रहा था और दो साल के इंतज़ार के बाद यह तैयार होकर मंत्रालय में आ गई है| शिक्षा जगत में सकरात्मक और बेहतर सुधार लाने के लिए इस पॉलिसी में सबसे ज्यादा फोकस भारतीय भाषाओं पर किया गया है|
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The Policy Times