नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सचिव उच्च शिक्षा अमित खरे और सचिव स्कूल शिक्षा अनीता करवाल ने एनईपी के बारे में बात करने के लिए शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की तथा

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव. The policy times

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सचिव उच्च शिक्षा अमित खरे और सचिव स्कूल शिक्षा अनीता करवाल ने एनईपी के बारे में बात करने के लिए शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की तथा औपचारिक रूप से घोषणा की।

इस बहु प्रतीक्षित नीति ने स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव किए हैं। इस नीति का लक्ष्य “भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति” बनाना है। 2040 तक, सभी उच्च शिक्षा संस्थान (एच ई आई) का उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा, जिनमें से प्रत्येक का लक्ष्य 3,000 या अधिक छात्र होंगे।

10+2 का प्रारूप खत्म

नई शिक्षा नीति में 10+2 के प्रारूप  को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 प्रारूप में ढाला गया है। इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 व कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे। फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा। इसके बाद में तीन साल मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) और माध्यमिक अवस्था के चार वर्ष (कक्षा 9 से 12)

इसके अलावा स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान धारा का कोई कठोर पालन नहीं होगा, छात्र अब जो भी पाठ्यक्रम चाहें, वो ले सकते हैं।

कक्षा 6 से शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोडिंग- स्कूल शिक्षा सचिव ने कहा कि कक्षा 6 और उसके बाद के छात्रों को 21 वीं सदी के कौशल के एक भाग के रूप में स्कूलों में कोडिंग सिखाई जाएगी।

छात्रों के लिए 360 डिग्री समग्र रिपोर्ट कार्ड- बच्चों के प्रगति पत्र मे बदलाव होंगे। छात्रों को 360 डिग्री समग्र प्रगति पत्र मिलेगा, जो न केवल विषयों में उनके द्वारा प्राप्त अंकों के बारे में सूचित करेगा, बल्कि उनके कौशल और अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी बताएगा।

छात्रों पर भाषा नहीं थोपी जाएगी- नीति के अनुसार, कक्षा पांचवीं तक और राज्य चाहें तो आठवीं तक की शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा होना चाहिए। स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत विकल्प के रूप में चुन सकेंगे। त्रि-भाषा सूत्र में भी यह विकल्प होगा। किसी भी विद्यार्थी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।

देश की अन्य भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे। विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा। भारतीय संकेत भाषा यानी साइन भाषा (आईएसएल) को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा। हालाँकि, नीति यह भी कहती है कि “किसी भी छात्र पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी”।

 बोर्ड परीक्षा मे बदलाव- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षा को लेकर अभिभावकों और बच्चों का तनाव कम किया गया। बोर्ड परीक्षाओं में विद्याथिर्यों की वास्तविक क्षमताओं एवं योग्यताओं को परखा जाएगा। छात्रों द्वारा रटे हुए सवालों पर बोर्ड परीक्षा का दारोमदार अब नहीं रहेगा। बोर्ड परीक्षा वार्षिक, सेमेस्टर या मोडयूलर मॉडल पर आधारित होगी।

कक्षा तीन, पांच व आठवीं में भी परीक्षाएं होगी। 10वीं और 12वीं में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 24 से ज्यादा विषय न हों। एक बार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौका मिलेगा।

 एनसीईआरटी अगले वर्ष तक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा 2020 तैयार करेगी। अब तक स्कूली शिक्षा  राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रूपरेखा 2005 के तहत चल रही है। 2022 की परीक्षा नए पाठ्यक्रम से होगी।

ज्ञान और रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की तैयारी 9वीं से 12वीं कक्षा तक चलेगी। वहीं, 2021 सत्र के लिए सीबीएसई समेत प्रदेश शिक्षा बोर्ड दसवीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा के लिए व्यवहार्य मॉडल तैयार करेंगे।


4 साल के डिग्री प्रोग्राम, एमफिल को खत्म किया गया

पहली बार डिग्री कोर्स में विभिन्न प्रवेश और निकास प्रणाली लागू होगा। विभिन्न प्रवेश और निकास प्रणाली में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी।

 नई प्रणाली में ये रहेगा कि एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी।

 4 साल का डिग्री प्रोग्राम फिर एम ए और उसके बाद बिना एमफिल के सीधा PhD कर सकते हैं। नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल कोर्सेज को खत्म किया गया।

तकनीक आधारित शिक्षा- ऐसी जगह जहां पारंपरिक और व्यक्तिगत शिक्षा का साधन नहीं होगा वहां, स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों को ई-माध्यमों से मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) बनेगा। इसका मकसद प्राइमरी से उच्च और तकनीकी शिक्षा तक में प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल करना है।

प्रौढ़ शिक्षा के लिए गुणवत्ता पूर्ण प्रौद्योगिकी-आधारित विकल्प जैसे एप्लिकेशन, ऑनलाइन पाठ्यक्रम / मॉड्यूल, उपग्रह-आधारित टीवी चैनल, ऑनलाइन किताबें, और आईसीटी से सुसज्जित पुस्तकालय और वयस्क शिक्षा केंद्र आदि विकसित किए जाएंगे। ई-सामग्री, जो हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, वो अब शुरू में 8 क्षेत्रीय भाषाओं- जैसे कन्नड़, उडिया, बंगाली और अन्य में भी उपलब्ध होगा। तकनीकी के माध्यम से दिव्यांगजनों में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए सामान्य एंट्रेंस एग्जाम- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए सामान्य एंट्रेंस एग्जाम का प्रस्ताव दिया जाएगा। यह संस्थान के लिए अनिवार्य नहीं होगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजन्सि यह परीक्षा कराएगी।

खोज को बढ़ावा देने को राष्ट्रीय खोज फाउंडेशन की होगी स्थापना- राष्ट्रीय खोज फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना होगी जिससे खोज और नवोन्मेष को बढ़ावा मिलेगा और  सभी तरह के वैज्ञानिक तथा सामाजिक अनुसंधानों को नेशनल खोज फाउंडेशन बनाकर नियंत्रित किया जायेगा। इसके अलावा उच्चतर शिक्षा के लिए एक ही रेग्यूलेटर रहेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। साथ ही प्रतिभाशाली बच्चे एवं कन्याओं के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। एस सी, एस टी,ओबीसी और एसईडीजीएस बच्चों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल को बढ़ाया गया है।

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