बच्चो को भिक्षा का श्राप नहीं शिक्षा का वरदान दो

भीख माँगना भारत के सबसे गंभीर सामाजिक मुद्दों में से एक है। यह एक अच्छी तरह से संगठित माफिया गिरोहों के सांठ गांठ से चलने वाला एक व्यवसाय है जो छोटे बच्चों के भोलेपन को अपने व्यवसाय को चलाने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करता है। लाखों बच्चों को अगवा कर लिया जाता है, ड्रग्स दिया जाता है, मारा पीटा जाता है और उनसे भीख मंगवाने के लिए मजबूर किया जाता है। बाल भिक्षावृत्ति कोई छोटा मुद्दा नहीं है, यह अब एक सामाजिक चिंता का रूप ले चुकी है क्योंकि लाखो बच्चे इस खतरनाक दलदल में फंसे हुए है।

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बच्चो को भिक्षा का श्राप नहीं शिक्षा का वरदान दो
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No Bheekh, Only Seekh

 


                                          बच्चो को भिक्षा का श्राप नहीं शिक्षा का वरदान दो

                                                        नो भीख केवल सीख

भीख माँगना भारत के सबसे गंभीर सामाजिक मुद्दों में से एक है। यह एक अच्छी तरह से संगठित माफिया गिरोहों के सांठ गांठ से चलने वाला एक व्यवसाय है जो छोटे बच्चों के भोलेपन को अपने व्यवसाय को चलाने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करता है। लाखों बच्चों को अगवा कर लिया जाता है, ड्रग्स दिया जाता है, मारा पीटा जाता है और उनसे भीख मंगवाने के लिए मजबूर किया जाता है। बाल भिक्षावृत्ति कोई छोटा मुद्दा नहीं है, यह अब एक सामाजिक चिंता का रूप ले चुकी है क्योंकि लाखो बच्चे इस खतरनाक दलदल में फंसे हुए है।

हम हर दिन कई बच्चों को सड़कों पर भीख माँगते हुए देखते हैं और हम इन्हें भीख देकर इस समस्या से मुंह मोड़ लेते है। क्या हम इस समस्या को अपने देश से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं?

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सिर्फ पैसा कमाने के मकसद से की जाने वाली बच्चों की तस्करी और दुर्व्यवहार के आंकड़ो के बारे में सोचकर हम सभी को शर्म आनी चाहिए। भारत में दुनिया में सबसे अधिक संख्या में बाल भिखारी हैं और सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह आंकड़े तीव्र गति से बढ़ रहे है।

हम में से अधिकांश इन बच्चों को कुछ पैसे देते हैं और फिर अपने कार्यो में लग जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि जब हमने उन्हें पैसे दिए तो वह माफियाओं की जेब में जाता है ना कि बच्चो के। एक तरह से हम इन माफियाओं और अपराधियों की मदद कर रहे हैं।

हाल ही में हरिद्वार पुलिस और मुंबई पुलिस ने अपने राज्यों से बाल भिखारियों के उन्मूलन के लिए कई अभियान चलाए लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा ऐसा कुछ नहीं किया गया।

यह देखकर इंडिया फॉर चिल्ड्रन ने एक जागरूकता अभियान “नो भीख, ओनली सीख” चलाया है।  अपने इस अभियान में हमने लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया है कि कैसे वे बच्चों को पैसे देकर माफियाओं और अपराधियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि वे वही पैसा उन NGOs को दें जो ऐसे बच्चो के शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

हम अगले पांच दिनों के लिए दिल्ली और एनसीआर क्षेत्रों में यह अभियान चलाकर लोगो के मध्य जागरूकता लाने का प्रयास करेंगे।

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हम चाहते हैं कि आप अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल में हमारे अभियान को प्रकाशित करें और हमारे स्वयंसेवकों और लोगों को प्रेरित करें ताकि वे कुछ माफियाओं को अपनी मेहनत की कमाई देना बंद करें और इसे ऐसे लोगों को दें जो बच्चों के बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।

इंडिया फॉर चिल्ड्रेन : 2017 में शुरू किया गया यह अभियान बच्चों के हित के लिए भारत का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफार्म है, जिससे 40 लाख से भी ज़्यादा लोग जुड़े है। इसका लक्ष्य है कि बच्चों के हक़ से जुड़े सभी हितधारी इस प्लेटफार्म के माध्यम से एक होकर बच्चों के लिए भारत को बेहतर बना सके।


 

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भीख माँगना भारत के सबसे गंभीर सामाजिक मुद्दों में से एक है। यह एक अच्छी तरह से संगठित माफिया गिरोहों के सांठ गांठ से चलने वाला एक व्यवसाय है जो छोटे बच्चों के भोलेपन को अपने व्यवसाय को चलाने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करता है। लाखों बच्चों को अगवा कर लिया जाता है, ड्रग्स दिया जाता है, मारा पीटा जाता है और उनसे भीख मंगवाने के लिए मजबूर किया जाता है। बाल भिक्षावृत्ति कोई छोटा मुद्दा नहीं है, यह अब एक सामाजिक चिंता का रूप ले चुकी है क्योंकि लाखो बच्चे इस खतरनाक दलदल में फंसे हुए है।