नोटबंदी से भारत के किसानो पर बुरा प्रभाव पड़ा: कृषि मंत्रालय

नोटबंदी के दो साल पुरे हो चुके है और इसका नतीजा अब दिखने लगा है| नोटबंदी से देश की अर्थव्यवथा जहाँ गिरी वहीँ आम जनता को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन मोदी सरकार द्वारा रातों रात लिए नोटबंदी के इस फैसले से सबसे अधिक किसानो के जीवन में बुरा प्रभाव पड़ा है|

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Notebandi had a bad effect on the farmers of India
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नोटबंदी के दो साल पुरे हो चुके है और इसका नतीजा अब दिखने लगा है| नोटबंदी से देश की अर्थव्यवथा जहाँ गिरी वहीँ आम जनता को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन मोदी सरकार द्वारा रातों रात लिए नोटबंदी के इस फैसले से सबसे अधिक किसानो के जीवन में बुरा प्रभाव पड़ा है|

कृषि मंत्रालय ने संसदीय समिति को भेजे अपने जवाब में यह स्वीकार किया है कि नोटबंदी की वजह से किसानों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा था|

‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने वित्त पर संसदीय स्थायी समिति को सौपे अपने रिपोर्ट में कहा कि नोटबंदी की वजह से भारत के लाखों किसान ठंड की फसलों के लिए खाद और बीज नहीं खरीद पाए थे|

कृषि मंत्रालय का बयान ऐसे समय पर आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में एक रैली के दौरान कहा था कि काला धन बैंकिग सिस्टम में वापस लाने के लिए नोटबंदी एक ‘कड़वी दवा’ थी|

वित्त पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोइली को बीते मंगलवार को कृषि मंत्रालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा नोटबंदी के प्रभावों के बारे में बताया गया|

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बाज़ार में कैश ख़त्म होने से किसानो की समस्याएँ बढ़ी थी  

कृषि मंत्रालय द्वारा सौंपे गए रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी ऐसे समय पर की गई जब किसान अपनी खरीफ फसलों की बिक्री और रबी फसलों की बुवाई में लगे हुए थे| इन दोनों कामों के लिए भारी मात्रा में कैश की जरूरत थी लेकिन नोटबंदी की वजह से सारा कैश बाजार से खत्म हो गया था|

मंत्रालय ने आगे कहा की भारत के 26.3 करोड़ किसान ज्यादातर कैश अर्थव्यवस्था पर आधारित हैं| इसकी वजह से रबी फसलों के लिए लाखों किसान बीज और खाद नहीं खरीद पाए थे| यहां तक कि बड़े जमींदारों को भी किसानों को मजदूरी देने और खेती के लिए चीजें खरीदने में समस्याओं का सामना करना पड़ा था|

कैश की कमी के वजह से राष्ट्रीय बीज निगम भी लगभग 1.38 लाख क्विंटल गेंहू के बीज नहीं बेच पाया था| ये स्थिति तब भी नहीं सुधर पाई जब सरकार ने कहा था कि 500 और 1000 के पुराने नोट गेंहू के बीज बेचने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं|

संसदीय समिति की बैठक के दौरान विपक्षी दलों के कई सदस्यों ने इसे लेकर काफी तीखे सवाल किए| सूत्रों ने बताया कि ऑल इंडिया त्रिणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने पूछा कि क्या सरकार को सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के उस रिपोर्ट की जानकारी थी जिसमें कहा गया है कि नोटबंदी के बाद जनवरी-अप्रैल 2017 के बीच 15 लाख लोगों की नौकरियां चली गईं| हालांकि श्रम मंत्रालय ने नोटबंदी की प्रशंसा करते हुए रिपोर्ट फाइल किया है|

मालुम हो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में कृषि संकट एक महत्वपूर्ण मुद्दा है| सभी पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में किसानों की स्थिति सुधारने का दावा किया है|

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नोटबंदी के दो साल पुरे हो चुके है और इसका नतीजा अब दिखने लगा है| नोटबंदी से देश की अर्थव्यवथा जहाँ गिरी वहीँ आम जनता को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन मोदी सरकार द्वारा रातों रात लिए नोटबंदी के इस फैसले से सबसे अधिक किसानो के जीवन में बुरा प्रभाव पड़ा है|
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