लॉकडाउन के दौरान ओटीटी मंच के बढे इस्तेमाल पर चर्चा

‘ निर्माताओं को इस बात को लेकर सजग होना चाहिए कि वह क्या बना रहे हैं और इसका जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।’’उन्होंने ‘मिर्जापुर’ आदि उत्तेजक वेब सेरीज़ो के उदाहरण भी दिए।

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OTT unfolded by experts in the phase of lockdown_The Policy Times

नोएडा : 29 जून डीएमई मीडिया स्कूल द्वारा दुनिया के पहले 10-दिवसीय डिजिटल लाइव अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के नौवें दिन ‘ओटीटी प्लेटफार्म: रीइंवेंशन एंड कंसम्पशन ड्यूरिंग लॉकडाउन’ विषय पर चर्चा की गई।

डॉ गौरी डी चक्रवर्ती, फिल्म-निर्माता, जॉइंट एक्टिंग हेड, एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा ने सत्र की अध्यक्षता की।

श्री नरेश शर्मा, FTII के पूर्व छात्र, फिल्म निर्माता और प्रमुख, CRAFT (सेंटर फॉर रिसर्च इन आर्ट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन), त्रैमासिक पत्रिका सिनेमैटोग्राफी आर्ट के संपादक और प्रकाशक, डॉ आनंदजीत गोस्वामी, लिबरल आर्ट्स के प्रोफेसर, समन्वयक / प्रभारी, राजनीतिक और सामाजिक अध्ययन विभाग, व्यवहार और सामाजिक विज्ञान संकाय, मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज, मानव रचना इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, श्री पंकज राकेश, पूर्व प्रमुख, प्रोडक्शन, मेटल फिल्म्स, मुंबई और स्वतंत्र फिल्म निर्माता और श्री विशेष आजाद, फिल्म निर्माता, कलाकार, मीडिया शिक्षक और फैशन संचारक निफ्ट सत्र में विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए।

डीएमई मीडिया स्कूल के डीन एवं ICAN3 के आयोजन सचिव, डॉ अम्बरीष सक्सेना ने सत्र की शुरुआत की। डीएमई मीडिया स्कूल की हेड एवं ICAN3 की संयोजक डॉ सुस्मिता बाला ने विशेषज्ञों का स्वागत किया।

डॉ. गौरी चक्रवर्ती ने ओटीटी मंचों और उन पर उपलब्ध सामग्री की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘ भारत में भारतीय वीडियो स्ट्रीमिंग पिछले एक साल में और हाल ही में महामारी की स्थिति के कारण काफी बढ़ी है। वीडियो देखने की आदतों में बदलाव आया है और डिजिटल ओटीटी मंच मूल वीडियो-ऑन-डिमांड और दिलचस्प सामग्री लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं।’’

इस पर श्री पंकज राकेश ने ओटीटी मंच के विभिन्न शो का हवाला देते हुए कहा , ‘‘ ओटीटी मनोरंजन का एक बेहतरीन साधन बन गया’’। लोगों की अंतरराष्ट्रीय सामग्री के प्रति बढ़ती रुचि पर उन्होंने कहा, ‘‘ अब सब घरों पर हैं, लोग अलग-अलग भाषाओं के शो आदि देख रहे हैं’’।

वहीं श्री नरेश शर्मा ने ओटीटी के सुविधाजनक होने के पहलु पर कहा , ‘‘ आपको इसे देखने के लिए किसी समय-सारणी में बंधना नहीं पड़ता, जैसा कि टीवी या बड़े पर्दे के साथ है। कोई भी जब चाहे तब अपनी सहूलियत से इसे देख सकता है।’’

डॉ. आनंदजीत गोस्वामी ने ओटीटी की जवाबदेही पर बात की। उन्होंने कहा, ‘‘ निर्माताओं को इस बात को लेकर सजग होना चाहिए कि वह क्या बना रहे हैं और इसका जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।’’उन्होंने ‘मिर्जापुर’ आदि उत्तेजक वेब सेरीज़ो के उदाहरण भी दिए।

विशेष आजाद ने श्री शर्मा की बात को दोहराते हुए कहा , ‘‘ ओटीटी मंच की वजह से ही लेखनी को उसकी सही जगह मिली है।’’

इस सत्र का समापन प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा ICAN3 के डिजिटल स्मारिका के अनावरण के साथ हुआ। इसमें ICAN3 के दौरान प्रस्तुत किए गए शोधपत्रों के सभी विवरण और सूची के साथ पूरे सम्मेलन का विवरण मौजूद है।  पैनल चर्चा का संचालन डीएमई मीडिया स्कूल की सहायक प्रोफेसर सुश्री कृष्णा पांडे ने किया।

दिन का पहला तकनीकी सत्र ‘सिनेमा फॉर कम्युनिटी बॉन्डिंग, शांति, सद्भाव और न्याय’ विषय पर केंद्रित था और इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ) अमन वत्स, एमिटी स्कूल ऑफ फिल्म एंड ड्रामा, एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा ने की। डॉ आरिफ नज़ीर, जनसंचार और वीडियो उत्पादन विभाग, डीएवी कॉलेज, कटरा शेर सिंह, अमृतसर, पंजाब इस सत्र के सह-अध्यक्ष थे। इस तकनीकी सत्र में कई शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

सत्र का संचालन सुश्री सुकृति अरोड़ा, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने किया और डीएमई की द्वितीय वर्ष की छात्रा सौम्या भास्कर ने सत्र की एंकरिंग की।

दिन का दूसरा तकनीकी सत्र देश के प्रमुख मुद्दों में से एक- ‘राष्ट्रीय पहचान, नागरिकता, स्टेटलेसनेस और सीएए के मुद्दे पर केंद्रित था।’ इसकी अध्यक्षता डॉ राजीव पांडा, एसोसिएट प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन – एआईएमसी, नई दिल्ली ने की। सत्र का संचालन डीएमई मीडिया स्कूल के सहायक प्रोफेसर श्री मोहम्मद कामिल ने किया और एंकरिंग डीएमई मीडिया स्कूल के द्वितीय वर्ष के छात्र आदित्य जैन ने की।

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