सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, किया प्रदर्शन

सबरीमाला मंदिर पर औरतों के प्रवेश से हटे प्रतिबन्ध को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें ज्यादतर महिलाएँ शामिल है|

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people protest against the entry of women in sabarimala mandir
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विगत 28 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में औरतों के प्रेवश के रास्ते खोल दिए थे । क्योंकि भगवान अयप्पा के ब्रह्मचारी होने की वजह से अब तक इस मंदिर में औरतों के जाने की मनाही थी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बावजूद कुछ संगठन इससे सहमत नहीं हैं। इस फैसले के विरोध में विभिन्न संगठनों के समर्थकों ने विभिन्न शहरों की सड़कों पर उतरकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अगुआई में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने महिलाओं के हक़ में फैसला सुनाया था कि केरल के सबरीमाला मंदिर में अब हर उम्र की महिलाएँ जा सकतीं है| वहीं इस फैसले के बाद देश भर में कुछ समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी है|

दशकों से अटका पड़ा मामला सबरीमाला मंदिर में महिलाओं पर लगे प्रतिबन्ध पर आखिरकार फैसला महिलाओं के हक़ में आया | देश की सर्वोच्च न्यायलय ने महिलाओं के हक़ में यह फैसला सुनाया था कि केरल के पथानमथिट्टा जिले में स्थित सबरीमाला मंदिर में अब हर उम्र की महिलाएँ जा सकतीं है| वहीं इस मामलें में फैसला आने के बाद कुछ समूहों का विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें विशेषकर रविवार को भगवान अयप्पा के भक्त बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन करते नज़र आए|

इससे पहले भी हालिया फैसले के खिलाफ सैकड़ों अयप्पा श्रद्धालुओं ने केरल के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया था| प्रदर्शनकारियों में महिलाएं भी शामिल थीं| इन प्रदर्शनों की शुरूआत करने वालों में अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद हैं जिसके संस्थापक प्रवीण तोगड़िया हैं| सुप्रीम कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन बताते हुए हटा दिया है| सबरीमाला मंदिर में परंपरा के अनुसार, 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध था| मंदिर ट्रस्ट की मानें तो यहां 1500 साल से महिलाओं के प्रवेश पर बैन लगा था| इसके लिए कुछ धार्मिक कारण बताए जाते रहे हैं|

सबरीमाला दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल

दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित सबरीमाला श्री अयप्पाे मंदिर दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थांनों में से माना जाता है। इस मंदिर में हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की भींड़ जुटती है, जिसमें केवल पुरुष ही होते हैं क्यूंकि इस मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित है।

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महिलाओं के प्रवेश पर क्यूँ था प्रतिबंध

सबरीमाला मंदिर प्रबंधन ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि 10 से 50 वर्ष की आयु तक की महिलाओं के प्रवेश पर इसलिए प्रतिबंध लगाया गया है क्योंकि मासिक धर्म के दौरान वे शुद्धता बनाए नहीं रख सकतीं| शीर्ष न्यायालय मंदिर में ऐसी महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की प्रथा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था| इस विवादास्पद मामलें में सरकार अपना रुख बदलती रही है| केरल सरकार ने 18 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह उनके प्रवेश के पक्ष में है|

सड़कों पर उतरे लोग

सबरीमाला मंदिर पर औरतों के प्रवेश से हटे प्रतिबन्ध को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें ज्यादतर महिलाएँ शामिल है| इस फैसले के खिलाफ सैकड़ों अयप्पा श्रद्धालु केरल के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर अपना विरोध जाहिर किया था| अब एक संस्था नेशनल अयप्पा डिवोटी एसोसिएशन की अध्यक्षा शैलजा विजयन ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है| याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला केरल के लोगों की धार्मिक भावनाओं के पहलू को अनदेखा कर दिया गया है|

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रविवार को भगवान अयप्पा के भक्तों ने प्रदर्शन किया। दिल्ली और तमिलनाडु के चेन्नई में किए गए इन प्रदर्शनों में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। भक्तों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जहां ‘अयप्पा नामा जापा’ यात्रा निकाली वहीं, चेन्नई में कोडम्बक्कम हाई रोड से महालिंगपुर श्री अयप्पा मंदिर तक विरोध मार्च निकाला।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते मंगलावार को 4000 से अधिक महिलाओं को विरोध के दौरान हिरासत में लिया गया है। इन महिलाओं की मांगे है कि केरल सरकार सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे। इन महिलाओं का कहना है कि यह फैसला 800 वर्ष पुरानी परंपरा पर विश्वास रखने वालों के खिलाफ था। इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।

इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराय विजयन ने पिछले सोमवार एक बैठक आयोजित की थी जिसमें मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के साथ सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आवश्यकता पर चर्चा की गई। इस बीच, सीपीआई-एम, भाजपा राज्य इकाई के साथ-साथ पांडलम रॉयल फैमिली समेत कई राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ निराशा व्यक्त की है। भाजपा राज्य इकाई ने कहा है कि सरकार मंदिर की परंपरा में विश्वास रखने वाले समर्थकों की भावनाओं पर विचार नहीं कर रही थी|

वहीँ, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने फैसले का स्वागत किया| स्वामी ने ट्वीट में लिखा, ”मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला में पूजा करने में लैंगिक समनता को माना है| मैं इसी की वकालत कर रहा था|”

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी ने कहा कि भगवान सबके लिए होते है| हिन्दू धर्म में तो औरतों का शक्ति का स्वरुप माना जाता है| ऐसे में किसकी हिम्मत होगी कि शक्ति को ही मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगा दें| उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने मंदिर को क्लब बना दिया है और यह फैसला उन क्लबों को वापस मंदिर में बदलने वाला है|

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग, किया प्रदर्शन
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सबरीमाला मंदिर पर औरतों के प्रवेश से हटे प्रतिबन्ध को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी है जिसमें ज्यादतर महिलाएँ शामिल है|
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