समर्थन और विरोध की राजनीती में बनी ‘टीपू जयंती’

येदियुरप्पा ने आरोप लगाया कि टीपू जयंती का जश्न मनाने के पीछे सरकार का इरादा मुस्लिम समुदाय को खुश करना है लेकिन हम टीपू जयंती उत्सव का विरोध करते है| वहीँ, भाजपा नेता ने एक ट्वीट में कहा कि टीपू जयंती उत्सव के पीछे सरकार का इरादा मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करना है|

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किसी देश को करीब से जानने के लिए इतिहास महत्वपूर्ण स्त्रोत है लेकिन कर्नाटक में आज एक बार फिरइतिहासको लेकर बवाल खड़ा हो गया| हर साल की तरह जेडीएसकांग्रेस की गटबंधन सरकार टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है परन्तु इस बीच बीजेपी और कुछ अन्य संगठन इस जयंती का विरोध कर रहें है| विरोध करने वालों में राज्य के मुख्यं विपक्ष पार्टी बीजेपी शामिल है| सीएम एचडी कुमारस्वाेमी ने सेहत से जुड़े कारणों का हवाला देकर इस प्रोग्राम से दूरी बना ली है|

टीपू जयंती को लेकर प्रदेश के मडिकेरी में सुरक्षा कड़ी की गयी| इसके साथ ही बंद का आह्वान भी किया गया| जहां कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है उसके आसपास बड़ी तादाद में आरएएफ की तैनाती की गई| सहूलियत के तौर पर श्रीरंगापट्टनम और कोडागू में शुक्रवार शाम से ही रविवार सुबह तक धारा 144 लागू कर दी गई है|

जेडीएसकांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार के मुखिया एचडी कुमारस्वामी ने पिछले सप्ताह ही साफ कर दिया था कि पिछली कांग्रेस सरकार की नीति को बरकरार रखते हुए 10 नवंबर कोटीपू जयंतीमनाई जाएगी| इसके बाद बीजेपी ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था| पार्टी ने सरकार से जश्न समारोह को रद्द करने की अपील करते हुए बेंगलुरु, मैसुरु और कोडागू में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया|

मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर बीजेपी का हमला

बीजेपी कर्नाटक सरकार पर हमला जारी रखते हुए एक ट्वीट किया कि कांग्रेसजेडीएस सरकार टिपू का जश्न मना रही है लेकिन मुख्यमंत्री स्वयं इस जश्न में शामिल नहीं हुए| जब मुख्यमंत्री स्वयं ही इस जयंती में शामिल नहीं हुए तो इस कट्टरपंथी जश्न मनाने का क्या मतलब है। बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार की कट्टर मानसिकता को दिखलाता है।

जबकि इस मसले पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी डॉक्टरों की सलाह से तीन दिन तक किसी भी आधिकारिक समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे|

कौन थे टीपू सुल्तान?

 

टीपू सुल्तान मैसूर के एक शासक थे| उन्होंने ब्रिटिश सेनाओं के खिलाफ श्रीरंगपट्टन में अपने किले की रक्षा करते हुए मारे गए थे। उन्हें राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानी माना जाता है जबकि भाजपा और राईट विंग हिंदू संगठन उन्हें हिन्दू विरोधी क्रूर शासक मानते है| कर्नाटक में जेडीएसकांग्रेस सरकार हमेशा सेटीपू जयंतीमनाया आया है किन्तु साल 2014 से बीजेपीटीपू जयंतीसमारोहों विरोध करते आई है|

गुरुवार को बीजेपी के राज्य प्रमुख बी.एस येदियुरप्पा ने योजनाबद्ध सभी कार्यक्रमों को रोकने के लिए कहा था| येदियुरप्पा ने आरोप लगाया कि टीपू जयंती का जश्न मनाने के पीछे सरकार का इरादा मुस्लिम समुदाय को खुश करना है लेकिन हम टीपू जयंती उत्सव का विरोध करते है| वहीँ, भाजपा नेता ने एक ट्वीट में कहा कि टीपू जयंती उत्सव के पीछे सरकार का इरादा मुस्लिम समुदाय को संतुष्ट करना है|

भाजपा पर सांप्रदायिक सद्भावना को बाधित करने का आरोप

पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने बीजेपी परटीपू जयंतीसमारोह के मुद्दे पर सांप्रदायिक सद्भाव को परेशान करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी टीपू जयंती मुद्दे पर सांप्रदायिक सद्भाव को तोड़ने की कोशिश कर रही है। हम उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।

मालुम हो सामाजिक कार्यकर्ता केपी मंजुनाथ ने टीपू सुल्तान की जयंती पर रोक लगाने के लिए 2017 में हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी| मंजुनाथ का कहना है कि टीपू सुल्तान हरगिज स्वतंत्रता सेनानी नहीं था और सूबे की सरकार सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कर रही है| मंजुनाथ ने कहा कि टीपू सुल्तान पर कोडवा लोगों का संहार करने, जबरिया धर्मपरिवर्तन कराने और कोडवा समुदाय पर जुल्म करने के आरोप हैं| उन्होंने कहा हम इस का विरोध करते हैं|

वहीँ, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में कांग्रेस और संघ परिवार के बीच काफी समय से वैचारिक जंग छिड़ी हुई है और मौजूदा विवाद इसी संघर्ष की देन है| चूंकि राज्य में विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर हैं इसलिए इस मसले का किसी भी पक्ष को फौरी राजनीतिक लाभ नहीं होने वाला। अलबत्ता, दक्षिणपंथी पार्टियां जरूर चाहेंगी कि यह मसला चुनाव तक जीवित रहे लेकिन कांग्रेस सरकार उनको यह मौका ही क्यों दे रही है?

टीपू सुल्तान एकधर्मनिरपेक्ष हीरो

इतिहासकारों के मुताबिक टीपू सुल्तान की जिंदगी विरोधाभासों का पुलिंदा है। सामान्यत: अंग्रेजों के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए कर्नाटक के लोगों में वह एक नायक के तौर पर लोकप्रिय रहे हैं। टीपू ने अंग्रेजों से जोरदार मोर्चा लिया था और उनके खिलाफ चौथी लड़ाई में उतरने से पहले उन्होंने अंग्रेजों को पराजित भी किया था।

 

टीपू सुल्तान अंग्रेजों को इस हद तक नापसंद करते थे कि उनको परास्त करने के लिए वह किसी से भी गठजोड़ कर सकते थे। कांग्रेस पार्टी टीपू सुल्तान को एक धर्मनिरपेक्ष हीरो के तौर पर देखती है और इस साल के गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली के राजपथ पर कर्नाटक की झांकी में टीपू की तस्वीर को पेश भी किया था|

टीपू को सुधारवादी माना जाता रहा है क्योंकि उन्होंने उद्योग, वाणिज्य, कृषि और सामाजिकसांस्कृतिक जीवन में नए विचारों को प्रोत्साहित किया था। उनकी हुकूमत इस देश की पहली सरकार थी जिसने बागवानी की अहमियत को पहचाना और बाकायदा उसके लिए अलग से एक विभाग बनाया| उन्होंने चंदनलकड़ी के व्यापार के तरीके में सुधार किए और रेशम के कीड़ों के उत्पादन की भी शुरुआत कराई|

टीपू अपनी फौज को रॉकेट विज्ञान से लैस करने के लिए भी जाने जाते हैं। मैसूरी रॉकेटों ने सुल्तान की फौज को जंग में विरोधियों पर बढ़त दिलाई थी| यहां तक कि टीपू सुल्तान के पास अपनी नौसेना भी थी|

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The Policy Times
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