ओखला वेस्ट प्लांट के प्रदुषण से 10 लाख लोगों का जीवन संकट में, लोगों ने प्लांट बंद करने की लगाई गुहार

प्लांट से निकलने वाले प्रदुषण का असर 10 किलोमीटर तक होता है जिसमें बदरपुर से लेकर निजामुद्दीन तक और लाजपत नगर से शाहिंनबाग़ तक के इलाके चपेट में है| इसके विरोध में लोगों ने रविवार सुबह विरोध नारों के साथ प्रदर्शन किया|

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In the life crisis of 10 million people polluting Okhla Waste Plant People have stopped planting the plant
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प्लांट से निकलने वाले प्रदुषण का असर 10 किलोमीटर तक होता है जिसमें बदरपुर से लेकर निजामुद्दीन तक और लाजपत नगर से शाहिंनबाग़ तक के इलाके चपेट में है| इसके विरोध में लोगों ने रविवार सुबह विरोध नारों के साथ प्रदर्शन किया|

प्रदुषण के मामले में देश की राजधानी दिल्ली का नाम हमेशा सुर्ख़ियों में रहता है| प्रदुषण से जुड़ा ऐसा ही एक मामला सुखदेव विहार से लगे ओखला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से निकलने वाले प्रदुषण का है जिसकी वजह से लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पढ़ रहा है| इस प्लांट से निकलने वाले प्रदुषण का असर 10 किलोमीटर तक होता है जिसमें बदरपुर से लेकर निजामुद्दीन तक और लाजपत नगर से शाहिंनबाग़ तक के इलाके चपेट में है| इसके विरोध में सुखदेव विहार, ईश्वर नगर, न्यू फ्रेंड्स कालोनी, ज़ाकिर बाग़, हाजी कालोनी, ग़फ्फार मंज़िल, जसोला पाकेट्स के लोगों ने रविवार सुबह विरोध नारों के साथ प्रदर्शन किया|

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सुखदेव विहार पॉकेट-ए आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एस खान ने बताया कि 16 जनवरी को प्लांट की ओर से जन सुनवाई का आयोजन किया गया था लेकिन कॉलोनी के लोगों ने विरोध करके जनसुनवाई रुकवा दी थी| प्लांट प्रशासन ने इसमें एक और चिमनी बना दी है| खान ने बताया कि प्लांट को यहां से हटाया जाना चाहिए| प्लांट के कारण इलाके के 10 लाख लोगों का जीवन संकट में है| लोगों ने कहा कि प्लांट में कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए ईधन और बायोगैस का उपयोग करना था लेकिन मिश्रित कचरे को जलाकर उन्होंने हवा को भी प्रदूषित किया है| इसमें से निकलने वाली मर्करी, फ्युरॉन, कार्बन मोनोऑक्साइड और डायॉक्सिन जैसी जहरीली गैसें लोगों को कैंसर व अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियां दे रही हैं|

रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में प्रदुषण की वजह से औसत उम्र चार साल कम हो चुकी है| प्लांट से क़रीब के इस ग्रिड में ऐसे लोग भी रहते हैं जिनके एक फोन पर यह प्लांट बंद हो सकता है मगर उन्हें प्लांट के मालिकों से अपने संबंध निभाना है| इस प्लांट के जारी रहने में कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी तीनों की भूमिका है मगर इन पार्टियों के स्थानीय कार्यकर्ता “मैं नहीं, वो” के खेल में उलझे हैं|

जो लोग इस लड़ाई को पिछले कुछ सालों से कोर्ट में लड़ रहे हैं वे शायद आधे अधूरे मन से लड़ रहे हैं या फिर यह मानना पड़ेगा कि सरकार में बैठे अधिकारी, पोल्यूशन कंट्रोल करने वाली सरकारी मशीनरी, एनजीटी और कोर्ट लोगों की सेहत को बर्बाद करने वाले इस तरह के प्लांट को ठीक समझते हैं| सुप्रीम कोर्ट के एक जज कह चुके हैं कि दिल्ली अब रहने के क़ाबिल नहीं रही| यह एक गैस चेंबर बन चुकी है|

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बहरहाल, दिल्ली एनसीआर का प्रदूषण लगातार खतरा बनता जा रहा है| पिछले कुछ समय से जहरीली हवा ने सभी को परेशान कर रखा है| दिल्ली के प्रदूषण पर नजर रखते हुए कई संस्थाएं कई तरह के रिसर्च कर रही है| इसी के चलते एक संस्था द्वारा किए गए रिसर्च के मुताबिक 50 प्रतिशत लोग दिल्ली की हवा को सांस लेने के लायक नहीं मानते| वहीं 24 प्रतिशत लोग हैं जिनका कहना है कि दिल्ली में हवा जहरीली हो चुकी है| वहीं, इस शोध मे सामने आया है कि 83 प्रतिशत लोगों का कहना है कि प्रदूषण का असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है| वह 3 प्रतिशत लोग ही हैं जो मानते हैं कि उनपर प्रदूषण का कोई असर नही है| दिल्ली के हालात की बात करें तो करीब 8 प्रतिशत लोग प्रदूषण से बचने के लिए शहर के बाहर चले जाते हैं|

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In the life crisis of 10 million people polluting Okhla Waste Plant People have stopped planting the plant
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प्लांट से निकलने वाले प्रदुषण का असर 10 किलोमीटर तक होता है जिसमें बदरपुर से लेकर निजामुद्दीन तक और लाजपत नगर से शाहिंनबाग़ तक के इलाके चपेट में है| इसके विरोध में लोगों ने रविवार सुबह विरोध नारों के साथ प्रदर्शन किया|
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The Policy Times