भाजपा का मोदी-महिमा और प्रज्ञा ठाकुर की भोपाल से उम्मीदवारी

इस बार के लोकसभा चुनाव में उतारे गए उम्मीदवारों को लेकर एक के बाद एक कई सवाल खड़े हो रहे है और विवाद भी पैदा हो रहें है जिसमें न सिर्फ राजनीती गरम है बल्कि जनता के बीच भी कहीं आक्रोश, तो कहीं ख़ुशी की लहर दिख रही है| भोपाल में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा की ओर से मैदान में उतरी प्रज्ञा ठाकुर को लेकर सियासत गर्म है|

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Highlights

  • 48 वर्षीय प्रज्ञा सिंह ठाकुर, 29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाकों में पहली बार सुर्ख़ियों में आयी|
  • तकरीबन नौ साल तक मुंबई में जेल में रहीं प्रज्ञा को अप्रैल 2017 में मुंबई उच्चतम न्यायालय ने ज़मानत पर रिहा कर दिया था|
  • प्रज्ञा ठाकुर को उतारने का सुझाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह ने स्वीकार कर लिया|
  • 2006 से लेकर 2008 के बीच हुए कई अन्य आतंकी वारदातों में भी प्रज्ञा ठाकुर की भूमिका को देखते हुए उसे आरोपी बनाया गया था|
  • इनमें 2006 में संघ कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या और 2007 में हुआ अजमेर दरगाह का धमाका भी शामिल है|

इस बार के लोकसभा चुनाव में उतारे गए उम्मीदवारों को लेकर एक के बाद एक कई सवाल खड़े हो रहे है और विवाद भी पैदा हो रहें है जिसमें न सिर्फ राजनीती गरम है बल्कि जनता के बीच भी कहीं आक्रोश, तो कहीं ख़ुशी की लहर दिख रही है| भोपाल में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा की ओर से मैदान में उतरी प्रज्ञा ठाकुर को लेकर सियासत गर्म है|

Related Article:हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा के बयान से नाराज़ पूर्व नौकरशाहों ने प्रज्ञा ठाकुर की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की

48 वर्षीय प्रज्ञा सिंह ठाकुर जो सन्यासी बनने के एक साल बाद 29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाकों में पहली बार सुर्ख़ियों में आयी, जिसके बाद महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया| उन पर मालेगांव में हुए बम धमाकों की साजिश करने के आरोप थे| तकरीबन नौ साल तक मुंबई में जेल में रहीं प्रज्ञा को अप्रैल 2017 में मुंबई उच्चतम न्यायालय ने ज़मानत पर रिहा कर दिया था|

आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को क्यों दिया गया टिकट?

प्रज्ञा ठाकुर भारतीय जनता पार्टी की पसंद है और बीजेपी को यह देश की अन्य राजनितिक पार्टियों से अलग करती है| विश्लेषकों का मानना है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को मज़बूत कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ उतारकर बीजेपी ध्रुवीकरण की उम्मीद कर रही है| प्रज्ञा ठाकुर को उतारने का सुझाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से आया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह ने एक चुटकी में स्वीकार कर लिया|

पीएम मोदी के कार्यकाल के दौरान बीजेपी हिन्दुत्व के नए पैरोकारों को मुख्यधारा में लेकर आई है जिनमें कट्टरपंथी साधु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ शामिल हैं और अब प्रज्ञा ठाकुर को सामने लाया गया है| जबकि हिन्दुत्व के वास्तविक कट्टर पैरोकारों की लिस्ट में शामिल लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शत्रुधन सिन्हा (जो अब कांग्रेस में शामिल हो गए है) जैसे लोकप्रिय और दिग्गज नेताओं को पार्टी ने रिटायरमेंट का कागज़ थमा दिया है|

वहीँ, अगर महिला नेताओं की बात करें तो इस बार लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, जो परंपरागत रूप से मध्यप्रदेश के इंदौर सीट से लडती रही है, उन्हें भी इस बार लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया गया और अन्य नेताओं की तरह रिटायर का दिया गया| साथ ही उमा भारती भी इस बार उम्मीदवारो की लिस्ट से गायब है| उमा भारती मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी है| इन्हें भी उम्मीदवार की लिस्ट से बाहर रखा गया है|

भारतीय जनता पार्टी का गठन सन 1980 में हुआ था| अपने गठन की शुरुआत से ही भारतीय जनता पार्टी हिन्दुओं के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त करती रही है और हिन्दू राष्ट्रवाद की पक्षधर रही है| हिन्दू राष्ट्रवाद के पक्षधर में बीजेपी में कट्टर हिन्दुत्ववादी विचारधारा की पैरवी करने वाले कई नेता आए लेकिन बीजेपी की छवि इससे पहले ऐसी ना थी जो आज वर्तमान में बन गई है| आज से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता भले ही हिन्दुवावाद के कट्टर समर्थक रहे परन्तु उन नेताओं की छवि आज के नेताओं की तुलना कही अधिक साफ़-सुथरी रही| लेकिन अगर आज भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा नेता को अपना उम्मीदवार बना रही है जिसका नाम हिंदुत्वा आतंकवाद के आरोप में शामिल है| इससे यह भी साफ़ होता है कि अब बीजेपी का हिन्दू राष्ट्र की विचार का समीकरण बदल रहा है|

आतंकवाद में प्रज्ञा ठाकुर का कनेक्शन

साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में बम विस्फोट हुआ उसमें पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और गिरफ्तार कर लिया| इस बम धमाके में कुल छह लोगों की मौत हुई थी और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे| प्रज्ञा इस मामले में मुख्य आरोपी थी| यही वह मामला है जिसमें प्रज्ञा के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल हुआ था| महाराष्ट्र एटीएस ने अपनी जांच में पाया कि इस धमाके में प्रज्ञा ठाकुर की मोटरसाइकिल एलएमएल फ्रीडम का इस्तेमाल किया गया था| इसके अलावा एटीएस के पास इस धमाके के बाद टैप की गई कुछ बातचीत की रिकॉर्डिंग भी थी जिनमें प्रज्ञा धमाके की जानकारी ले रही थीं और साथ में इस बात के लिए नाराज हो रही थी कि इतने कम लोग क्यों मरे|

इसके अलावा 2006 से लेकर 2008 के बीच हुए कई अन्य आतंकी वारदातों में भी प्रज्ञा ठाकुर की भूमिका को देखते हुए उसे आरोपी बनाया गया था| इनमें 2006 में संघ कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या और 2007 में हुआ अजमेर दरगाह का धमाका भी शामिल है| 2017 में देवास की अदालत ने सुनील जोशी हत्या मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया| राजस्थान एटीएस ने प्रज्ञा ठाकुर पर आरोप लगाया था कि उसने अजमेर दरगाह में ब्लास्ट से पहले उन तमाम बैठकों में हिस्सा लिया जिसमें इस धमाके की साजिश रची गई|

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इसके अलावा प्रज्ञा ठाकुर अपने विवादित बयानों के कारण कई बार सुर्ख़ियों में आई| हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि वह 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने वाले लोगों में से थीं और उन्हें इस पर गर्व हैं| प्रज्ञा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर माहौल गरमा गया था| इसके साथ ही 26/11 हमले में शहीद हुए मुंबई एटीएस के चीफ हेमंत करकरे पर बयान दिया जिसमें साध्वी ने कहा, ‘हेमंत करकरे ने मुझे मालेगांव ब्लास्ट मामले में झूठे आरोप में फंसाया और मेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया| मैंने उससे कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा| ठीक सवा महीने तक सूतक लगतार है| जिस दिन मैं गई थी उस दिन इसके सूतक लग गया था| ठीक सवा महीने में जिस आतंकवादियों ने इसको मारा उस दिन उसका अंत हुआ|

प्रज्ञा ठाकूर को उम्मीदवार के रूप में राजनितिक मैदान में उतारने के बाद सवाल खड़ा होता है कि भाजपा में कई ऐसे अनुभवी और बड़े चेहरें है, बाजजूद इसके भाजपा ने आतंकवाद की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को लोकसभा चुनाव का टिकट क्यों दिया?

Summary
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Pragya Thakur's candidature from Bhopal
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इस बार के लोकसभा चुनाव में उतारे गए उम्मीदवारों को लेकर एक के बाद एक कई सवाल खड़े हो रहे है और विवाद भी पैदा हो रहें है जिसमें न सिर्फ राजनीती गरम है बल्कि जनता के बीच भी कहीं आक्रोश, तो कहीं ख़ुशी की लहर दिख रही है| भोपाल में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भाजपा की ओर से मैदान में उतरी प्रज्ञा ठाकुर को लेकर सियासत गर्म है|
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The Policy Times