प्रोफेसर के जी सुरेश का खोजी पत्रकारिता की वापसी पर व्याख्यान

COVID दौर के बाद की पत्रकारिता के बारे में बात करने के लिए प्रोफेसर के जी सुरेश से बेहतर कोई नहीं हो सकता।

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Three US scholars Dr Jatin, Dr Deb and Dr Sundeep, Prof. Ranjit of DTC and Prof. KG Suresh of MCU reinforce communication technologies for media

नोएडा: ICAN4 के सातवें दिन की शुरुआत माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के कुलपति प्रो के जी सुरेश के सत्र से हुई। प्रो के जी सुरेश द्वारा संचालित मास्टर क्लास 9 KAA विषय ‘कोविड-19 के मद्देनजर पत्रकारिता की बदलती गतिशीलता और समाज पर इसका प्रभाव’ था।

चर्चा की शुरुआत करते हुए सम्मलेन के संयोजक डॉ अंबरीष सक्सेना ने कहा, “पत्रकारिता एक बहुत ही गतिशील क्षेत्र है। इसमें हर पल कुछ नया होता है। नए सिरे से जानकारी आती है और उसकी व्याख्याओं पर बहस होती है। यही इस पेशे की खूबसूरती भी है। मीडिया नाटकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल डिवाइड लोगों को प्रभावित कर रहा है। COVID दौर के बाद की पत्रकारिता के बारे में बात करने के लिए प्रोफेसर के जी सुरेश से बेहतर कोई नहीं हो सकता।”

Three US scholars Dr Jatin, Dr Deb and Dr Sundeep, Prof. Ranjit of DTC and Prof. KG Suresh of MCU reinforce communication technologies for mediaमहामारी के संदर्भ में पत्रकारिता के ट्रेंड के बारे में बात करते हुए प्रो. सुरेश ने टिप्पणी की कि, “ऐसा लगता है कि हम वापस ग्रासरूट से जुड़ रहे हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों ने मीडिया का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण पत्रकारिता के चलन में आए बदलाव से हमारी प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। प्रो सुरेश ने संचार के सभी पहलुओं में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के महत्व के साथ-साथ साक्ष्य-आधारित रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, “लोग अब अपने रुचि और जरूरतों के आधार पर मीडिया कंटेंट की तलाश कर रहे हैं और इसी में टेक्नोलॉजी काम में आती है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है, यह एक प्रमुख कारण है कि लोगों को अब वह कंटेंट प्राप्त हो रहा है जो वे चाहते हैं।”

प्रोफेसर सुरेश ने वर्तमान पत्रकारिता के कई पहलुओं को छूते हुए पत्रकारों की आवश्यकता पर भी विचार व्यक्त किये। सत्र का समापन डीएमई मीडिया स्कूल के डीन डॉ सक्सेना के उध्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा “पत्रकारिता पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव का असर समाज पर भी देखने को मिलता है।” उन्होंने सत्र के लिए प्रो सुरेश को धन्यवाद दिया। सुश्री कृष्णा पांडे, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने सत्र का संचालन किया, प्रथम वर्ष की छात्रा नंदिनी श्रीवास्तव ने इसमें एंकरिंग की।

टेक्निकल सेशन 6

ICAN-4 के सातवे दिन तकनीकी सत्र VI का आयोजन किया गया। तकनीकी सत्र का विषय ‘आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के दौर में इंटीग्रेटेड मार्केटिंग कम्युनिकेशन’ था। सत्र की अध्यक्षता डॉ सपना एमएस, प्रोफेसर, पत्रकारिता विभाग और सामुदायिक रेडियो मानसा, मैसूर विश्वविद्यालय, कर्नाटक ने की और सत्र संचालन डॉ टिनम बोरा, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल के द्वारा किया गया। सत्र के दौरान इंटेलिजेंट एडवरटाइजिंग पर एआई का प्रभाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सोशल मीडिया और संचार में विज्ञापन प्रचार और टेलीविजन विज्ञापनों में रुझान जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

Three US scholars Dr Jatin, Dr Deb and Dr Sundeep, Prof. Ranjit of DTC and Prof. KG Suresh of MCU reinforce communication technologies for mediaसत्र अध्यक्ष का स्वागत करते हुए, डॉ अंबरीष सक्सेना ने कहा, “हमने कोविड को पृष्ठभूमि में रखते हुए सभी विषयों को चुना है क्योंकि इसने जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। हम सत्र को हाइब्रिड मोड में रखने की उम्मीद कर रहे थे लेकिन इस बार दूसरी लहर ने हमें ऐसा नहीं करने दिया। लेकिन हमारे पास जो कुछ भी है उसका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। महामारी के दौरान विज्ञापनदाताओं द्वारा अपनाई गई विभिन्न प्रकार की मार्केटिंग तकनीकों के महत्व को देखते हुए इस विषय को चुना गया था। मैं आज सभी शोध प्रस्तुतियों को सुनने के लिए उत्सुक हूं।” डॉ सपना ने अपनी टिप्पणी में कहा, “हम एआई का उपयोग तब से कर रहे हैं जब हम छोटे थे लेकिन जब से कोविड -19 ने अपना कहर ढाया है, हमारा जीवन पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर हो गया है। आज इस विषय पर हुए शोध चर्चा को सुनना निश्चित रूप से दिलचस्प होगा।”

सुश्री श्रुति वीएस, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल को इस तकनीकी सत्र के अंत में ‘पर्यटन पर मध्यस्थता लोकप्रिय संस्कृति का प्रभाव – गेम ऑफ थ्रोन्स फेनोमेनन’ विषय पर शोधप्रस्तुति के लिए तकनीकी सत्र 5 का सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुतकर्ता घोषित किया गया।
मास्टर क्लास 10

Three US scholars Dr Jatin, Dr Deb and Dr Sundeep, Prof. Ranjit of DTC and Prof. KG Suresh of MCU reinforce communication technologies for mediaICAN4 के सातवें दिन का तीसरा सत्र प्रोफेसर (डॉ) रंजीत वर्मा, निदेशक, दिल्ली टेक्निकल कैंपस , ग्रेटर नोएडा, जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा संचालित मास्टर क्लास 10 था। मास्टर क्लास का विषय ‘मीडिया संदेश के प्रभावी प्रसारण के लिए संचार प्रौद्योगिकी’ था।

प्रोफेसर वर्मा ने संचार टेक्नोलॉजी के विकास पर चर्चा करते हुए कहा कि, “संचार हजारों साल पहले शुरू हुआ था। हालांकि अब प्रक्रिया और साधन विकसित हो गए हैं लेकिन संचार का मूलभाव आज भी वही है। मौजूदा पत्रकारिता के समय में तकनीकी और पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों को एकरूप से देखना बेहद ज़रूरी है।” प्रोफेसर वर्मा ने सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी के प्रभाव पर जोर दिया। “पिछले कुछ वर्षों में संचार साधनों के प्रभाव और आईटी के कारण, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस निश्चित रूप हमारे संचार के तरीके को बदल देगी।” आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के संदर्भ में गोपनीयता के मुद्दों पर प्रोफेसर वर्मा ने सुझाव दिया कि सभी को सुरक्षित और बुद्धिमानी से टेक्नोलॉजी का उपयोग करना सीखना चाहिए।

डॉ सुस्मिता बाला ने धन्यवाद प्रस्ताव के साथ सत्र का समापन किया। डॉ मनस्वी माहेश्वरी, एसोसिएट प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने सत्र का संचालन किया और प्रथम वर्ष की छात्रा खुशी चौधरी ने सत्र में एंकरिंग की।

पैनल डिस्कशन 3

ICAN4 का छठा दिन “तकनीकी नवाचारों और मीडिया शिक्षा का भविष्य” विषय पर पैनल डिस्कशन 3 के साथ समाप्त हुआ। सत्र का संचालन ओहियो यूनिवर्सिटी के असोसिएट प्रोफेसर और डायरेक्टर, इंटरनेशनल जर्नलिज्म इंस्टिट्यूट, ईडब्ल्यू स्क्रिप्स स्कूल ऑफ जर्नलिज्म ओहियो, यूएसए के डॉ जतिन श्रीवास्तव, ने किया।

पैनल में मीडिया शिक्षण विषय के विशेषज्ञ डॉ देब ऐकत, एसोसिएट प्रोफेसर, नार्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी, चैपल हिल, यूएसए, डॉ संदीप मुप्पीडी, प्रोफेसर, हार्टफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए, डॉ सुनेत्रा सेन नारायण, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली, और डॉ उमा शंकर पांडे, एसोसिएट प्रोफेसर और हेड, सुरेंद्रनाथ कॉलेज फॉर विमेन, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और आईएएमसीआर (IAMCR) के भारतीय राजदूत शामिल थे।

सत्र की शुरुआत करते हुए, सम्मेलन के संयोजक डॉ अंबरीष सक्सेना ने कहा कि मीडिया शिक्षण में टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इससे बेहतर कोई सत्र नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, “हम तकनीकी प्रगति और नवाचारों की दृष्टि से मीडिया शिक्षण के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि यह चर्चा मीडिया शिक्षा और प्रौद्योगिकी के उपयोग के सन्दर्भ में नई मिसाल कायम करेगी”।

डॉ जतिन श्रीवास्तव ने अतीत और भविष्य में मीडिया शिक्षण की मुख्य विशेषताओं को और प्रौद्योगिकी की प्रासंगिकता की चर्चा से सत्र की शुरुआत की। उन्होंने कहा “मीडिया एक बहुआयामी क्षेत्र है। विभिन्न विषयों से सम्बंधित लोग मीडिया शिक्षण में शामिल होते हैं। यह एक ऐसा क्षितिज है जहाँ सभी विविध संस्कृतियां आकर मिलती हैं”। टेक्नोलॉजी के उपयोग के बारे में डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि हम टेक्नोलॉजी से इतने उत्साहित हो गए हैं कि सकारात्मक रूप से आलोचनात्मक होना ही भूल गए।

डॉ देब ऐकत ने कहा कि पत्रकार बनने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती। “गांधी जी कभी पत्रकारिता स्कूल नहीं गए, फिर भी वह दुनिया के सबसे महान संचारकों में से एक थे”। उन्होंने कहा “मीडिया के क्षेत्र में निरंतर परिवर्तन आ रहे हैं और शोधकर्ताओं के लिए इस विषय पर शोध के लिए इससे अनुकूल समय और कोई नहीं हो सकता”।

डॉ SANDEP मुप्पीडी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी कार्यक्षमता के शीर्षबिंदु तक पहुंचाना मीडिया की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा “मीडिया शिक्षा का उद्देश्य छात्रों के बीच रचनात्मक, जागरूक और आलोचनात्मक सोच पैदा करना होना चाहिए”।

डॉ उमा शंकर पांडे ने कहा कि मीडिया शिक्षा को हमेशा एक ट्रेनिंग प्रोग्राम की नज़र से देखा गया है। नई शिक्षा नीति इस तरह की सभी धारणाओं को खत्म कर देगी। उन्होंने कहा “हमने अभी भी डिजिटल तकनीक का सम्पूर्ण तरीके से इस्तेमाल नहीं किया है। भविष्य ब्रॉडबैंड और मोबाइल फोन प्रौद्योगिकी में निहित है”।

डॉ सुनेत्रा सेन नारायण ने अपने वक्तव्य में स्थानीय पत्रकारिता की प्रासंगिकता के बारे में बताया। उन्होंने कहा “मीडिया शिक्षा और जन संचार शिक्षा को विभाजित करने वाली रेखा बारीक है लेकिन पत्रकारिता और मीडिया शिक्षा के बीच अंतर अवश्य है”।

डॉ जतिन ने यह कहते हुए चर्चा का सार प्रस्तुत किया कि कन्वर्जेन्स ही भविष्य है। टेक्नोलॉजी जरूरी है लेकिन समय की मांग इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और उससे जुडी जिम्मेदारी को समझना है। सत्र का समापन डॉ सुस्मिता बाला, हेड डीएमई मीडिया स्कूल, के विचारों के साथ हुआ जिसमे उन्होंने मीडिया शिक्षा के साथ टेक्नोलॉजी को एकीकृत करने पर ज़ोर दिया।


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Mohd Kamil
Assistant Professor, DME Media School
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ICAN4 2021


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