आत्मरक्षा व्यक्ति का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 से लेकर 106 तक की धारा में सभी व्यक्तियों को आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया है।

0
598 Views


पुलिस और क़ानून व्यवस्था के बावजूद देश में अपराध की घटनाएं हर रोज़ बढ़ रही है। कई बार लोगों के पास इतना वक़्त नहीं होता कि वो पुलिस से सहायता मांग सके। ऐसे में क़ानून ने हमें आत्मरक्षा का अधिकार दिया है।

भारत में अपनी सुरक्षा और अपनी संपत्ति की रक्षा करना आपका मौलिक अधिकार है। इतना ही नहीं आपको अपने परिजनों की सुरक्षा का भी अधिकार मिला हुआ है। इसे कानून की भाषा में आत्मरक्षा का अधिकार यानी राइट टू सेल्फ डिफेंस कहा जाता है। आईपीसी की धारा 96 से लेकर 106 तक तक आत्मरक्षा के अधिकार का जिक्र किया गया है।

Also Read:Supreme Court gets four new judges, strength rises from 24 to 28

क्या कहता आईपीसी धारा 96 से लेकर 106 तक?

आईपीसी की धारा 96 से लेकर 106 तक राइट टू सेल्फ डिफेंस का प्रावधान है। इसके तहत हर व्यक्ति को अपनी सुरक्षा, अपनी पत्नी की सुरक्षा, अपने बच्चों की सुरक्षा, अपने करीबियों और अपनी संपत्ति की सुरक्षा कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में अगर आत्मरक्षा में किसी की जान चली जाती है तो राइट टू सेल्फ डिफेंस के तहत रियायत मिल सकती है। गाली गलौज के खिलाफ राइट टू सेल्फ डिफेंस उपलब्ध नहीं है यानी अगर कोई आपको गाली देता है, तो आप इसके जवाब में उसको गाली नहीं दे सकते हैं। आत्मरक्षा का अधिकार सिर्फ फिजिकल हमले के खिलाफ ही उपलब्ध है।

आत्मरक्षा का अधिकार है मौलिक अधिकार

आत्मरक्षा का अधिकार सिर्फ कानूनी ही नहीं बल्कि मौलिक अधिकार भी है। आत्मरक्षा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन के अधिकार के तहत आता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई फैसलों में इस बात पर जोर दिया है कि राइट टू सेल्फ डिफेंस एक मौलिक अधिकार है।

Self-Defense Person's Rights-Supreme Court

आत्मरक्षा के अधिकार की सीमाएं

राइट टू सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के अधिकार के तहत सामने वाले को उतनी ही चोट या नुकसान पहुंचा सकते हैं, जितनी वह आप को पहुंचाना चाहता है।  मान लीजिए अगर कोई आप पर डंडे से हमला करता है, तो आप भी आत्मरक्षा में डंडे का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन उस पर आप गोली नहीं चला सकते। यदि सामने वाले के हाथ में पिस्तौल है और वह गोली चलाने वाला है, तो आप भी आत्मरक्षा में गोली चला सकते हैं। यह आपका आत्मरक्षा का अधिकार माना जाएगा।

किन परिस्थितियों में मिलता है आत्मरक्षा का अधिकार

आईपीसी की धारा 103 के मुताबिक रात में घर में सेंध लगने, लूटपाट होने, आगजनी और चोरी होने जैसी परिस्थितियों में अगर आपको अपनी जान का खतरा है, तो आपको आत्मरक्षा का अधिकार है। यदि आप पर कोई एसिड अटैक करता है तो आपकी जवाबी कार्रवाई को आत्मरक्षा के अधिकार तहत कार्रवाई मानी जाएगी। अगर किसी महिला को लगता है कि कोई व्यक्ति उस पर हमला करने वाला है या रेप करने की कोशिश करता है, तो वह अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर सकती है और यह उसका आत्मरक्षा का अधिकार होगा।

जान का खतरा होना जरूरी 

सेल्फ डिफेंस में अगर किसी पर गोली चलाई गई हो तो यह साबित करना होगा कि गोली चलाए बिना उसकी खुद की जान नहीं बच सकती थी। अगर कुछ अपराधी हथियारों के साथ किसी के घर में लूट अथवा चोरी के इरादे से घुसता है तो ऐसी स्थिति में निश्चित तौर पर घर के मालिक की जान को खतरा हो सकता है। ऐसी सूरत में घर का मालिक जान माल की रक्षा के लिए अपने लाइसेंसी हथियार से गोली चला सकता है और इस गोलीबारी में अगर किसी अपराधी की मौत हो जाए तो घर का मालिक अपने सेल्फ डिफेंस की दलील दे सकता है। तब अदालत यह देखेगी कि क्या वाकई अपराधी हथियारों से लैस थे। कानूनी जानकार बताते हैं कि अगर कोई सेंधमार चोरी के इरादे से घर में घुसता है तो ऐसी सूरत में उस पर गोली चलाना सेल्फ डिफेंस के दायरे से बाहर होगा क्योंकि ऐसी सूरत में उसे रोकने के लिए उसे डंडे आदि से पीटने पर भी बचाव हो सकता था।

डिफेंस में मौत भी माफ

आईपीसी की धारा-96 के तहत सेल्फ डिफेंस की बात कही गई है। वहीं आईपीसी की धारा-97 के तहत बताया गया है कि प्रत्येक शख्स को शरीर और संपत्ति की रक्षा का अधिकार है और इसके लिए वह सेल्फ डिफेंस में अटैक कर सकता है। वहीं धारा-99 कहता है कि सेल्फ डिफेंस रीजनेबल होना चाहिए। यानी अपराधी को उतनी ही क्षति पहुंचाई जा सकती है जितनी जरूरत है। धारा-100 के मुताबिक सेल्फ डिफेंस में अगर किसी अपराधी की मौत भी हो जाए तो भी बचाव हो सकता है बशर्ते कानूनी प्रावधान के तहत ऐसा एक्ट किया गया हो। अगर गंभीर चोट पहुंचने का खतरा हो, रेप या फिर दुराचार का खतरा हो, अपराधी अगर अपहरण की कोशिश में हो तो ऐसी सूरत में सेल्फ डिफेंस में किए गए अटैक में अगर अपराधी की मौत भी हो जाए तो अपना बचाव किया जा सकता है। लेकिन यह साबित करना होगा कि उक्त कारणों से अटैक किया गया।

Also Read:क्या सरकार की कठपुतली बन जाएगा आरटीआई कानून?

भीड़ नहीं उतार सकती गुस्सा 

कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि जब गली मोहल्ले में चोर, झपटमार या फिर छेड़छाड़ आदि के आरोपी पकड़े जाते हैं और मॉब गुस्से में उसके साथ मारपीट करती है लेकिन कानूनी तौर पर किसी भी ऐसे आरोपी के साथ मारपीट नहीं की जा सकती। सीआरपीसी की धारा-43 के तहत आम पब्लिक को यह अधिकार है कि वह संज्ञेय अपराध होने की स्थिति में आरोपी को पकड़ सकती है और पुलिस के हवाले कर सकती है लेकिन कानून किसी को भी अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। आरोपी के साथ पुलिस भी मारपीट नहीं कर सकती। किसी भी आरोपी को कानून के तहत ही सजा दी जा सकती है।



Summary
Article Name
Self-Defense Person's Rights-Supreme Court
Description
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 से लेकर 106 तक की धारा में सभी व्यक्तियों को आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया है।
Author
Publisher Name
The Policy Times