आधार पे सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मोबाइल और बैंक में नहीं देनी होगी आधार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार की अनिवार्यता को लेकर बड़ा फैसला दिया है| देश की सबसे बड़ी अदालत ने कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध किया है| वहीं दूसरी ओर आधार की संवैधानिकता के कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखी गई है|

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supreme court decided aadhaar status: not compulsory for mobile and bank account
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार की अनिवार्यता को लेकर बड़ा फैसला दिया है| देश की सबसे बड़ी अदालत ने कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध किया है| वहीं दूसरी ओर आधार की संवैधानिकता के कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखी गई है| हालांकि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आधार से निजता हनन के सुबूत नहीं मिले हैं| वहीं शीर्ष अदालत ने स्कूलों, बैंक खाते, मोबाइल सिम आदि के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता खारिज कर दी है, लेकिन कुछ स्थानों पर आधार कार्ड की अनिवार्यता जारी रहेगी|

करीब 30 याचिकाओं पर 38 दिन तक चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था|

आइए जानते है आधार पर कोर्ट की दस बड़ीं बातें और कहां पड़ेगी आधार की जरूरत और कहां नहीं-

  • स्कूलों, बैंक अकाउंट और सिम कार्ड खोलने के लिए आधार जरूरी नहीं|
  • निजी कंपनी आधार नहीं मांग सकती|
  • सोशल वेलफेयर स्कीम का फायदा बिना आधार के देना होगा|
  • पैन कार्ड से आधार लिंक कराना होगा जरूरी|
  • इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार कार्ड होगा जरूरी|
  • देश में अवैध रूप से रह रहे लोग को आधार नहीं दिया जाएगा.

दरअसल, आधार मामलें पर फैसला सुनाने वाली संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस ए.एम खानविलकर, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं| अब जानते हैं इन पाचों ने अपने फैसले में क्या कहा|

फैसले से जुड़ी खास बातें

सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि “इस फैसले का असर बहुत दूर तक होगा, क्योंकि आधार बहुत सारे सब्सिडी से जुड़ा है|

मुकुल रोहतगी ने कहा कि आधार लूट और बरबादी को रोकने में भी कारगर है, जो होती रही हैं. डेटा की सुरक्षा बेहद अहम है, और सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह डेटा की सुरक्षा करेगी| इस सिलसिले में कानून भी लाया जा रहा है|

इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनना शुरू किया.कोर्ट ने कहा कि आधार से समाज के बिना पढ़े-लिखे लोगों को पहचान मिली है और आधार का डुप्लीकेट बनाना संभव नहीं है| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूनिक का मतलब सिर्फ एक से है|

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह माना कि आधार आम आदमी की पहचान है और कहा कि आधार की वजह से निजता हनन के सबूत नहीं मिले हैं| सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर फैसला सुनाते हुए आधार की संवैधानिकता में कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखा|

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार के बायोमीट्रिक डेटा की नकल नहीं की जा सकती| साथ ही कोई प्राइवेट पार्टी भी डेटा नहीं देख सकती है| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार का ऑथेंटिकेशन डाटा सिर्फ 6 महीने तक ही रखा जा सकता है|

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी, सीबीएसई और निफ्ट जैसी संस्थाएं आधार नहीं मांग सकती हैं| साथ ही स्कूल भी आधार नहीं मांग सकते हैं| सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवैध प्रवासियों को आधार न दिया जाए|

कोर्ट ने कहा कि मोबाइल और निजी कंपनी आधार नहीं मांग सकती हैं| कोर्ट ने आधार को मोबाइल से लिंक करने का फैसला भी रद्द कर दिया| कोर्ट ने आधार को बैंक खाते से लिंक करने के फैसले को भी रद्द कर दिया|

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से पैन कार्ड को जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा| जस्टिस सीकरी ने कहा, किसी भी बच्चे को आधार नंबर नहीं होने के कारण लाभ/सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है|

सुप्रीम कोर्ट ने आधार अधिनियम की धारा 57 हटा दी| दूसरी तरफ अब कोर्ट की अनुमति के बिना आधार का बायोमेट्रिक डेटा किसी एजेंसी को नहीं दिया जाएगा| कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा मामलों में एजेंसियां आधार मांग सकती हैं|

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार को रेगुलर बिल की तरह पारित किया जा सकता है| वर्ष 2016 में इसे मनी बिल के तौर पर पारित किया गया था|

जदयू सांसद केसी त्यागी ने आधार कार्ड योजना से होने वाले खतरे पर सरकार से सवाल पूछे। पर इन सवालों पर सरकार ने जो जवाब दिए वो संदेह उत्पन्न करते हैं। सरकार ने कहा कि आधार कार्ड योजना सरकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए शुरू की गई है। इससे गरीबों का फायदा होगा। वहीं अदालत कह रही है कि इसे किसी योजना से जोड़ना और अनिवार्य करना गलत है। जबकि, सच्चाई यह है कि कई सालों से सरकार की तरफ से भ्रम फैलाया जा रहा है।

जनता को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि आधार कार्ड बनते ही देश में सरकारी काम आसान हो जाएगा, सारी योजनाएं सफल होने लगेंगी। जो योजना गरीबों तक नहीं पहुंच पाती, वह पहुंचने लगेगी और सभी लोगों को बीज एवं खाद की सब्सिडी मिलने लगेगी। अब सवाल यह है कि क्या आधार कार्ड से जुड़ी बायोमीट्रिक जानकारियां किसी विदेशी कंपनी या एजेंसी के साथ साझा की जाएंगी या नहीं? लेकिन सरकार ने अपने जवाब में इस सवाल को ही गायब कर दिया। देश में लोगों का सारा बायोमीट्रिक डाटा विदेशी कंपनियों को सौंपा जाएगा। हैरानी की बात ये है कि इन कंपनियों में सालों का करार हैं जिसके चलते यह सालों तक डेटा का लेन-देन करेंगी। मतलब यह कि जो डाटा यूआईडी के नाम पर इकट्ठा किया जा रहा है, वह सुरक्षित नहीं है। इसकी कोई गारंटी नहीं है कि इसे किसी और देश को नहीं बेचा जा सकता है और इनका गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यूआईडी और एसेंचर कंपनी के बीच हुए समझौते का अनुच्छेद 15.1 कहता है कि इस अनुबंध के तहत एसेंचर सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड की टीम भारत के किसी भी निवासी की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग कर सकती है और यह इसकी सबसे ज्यादा खतरनाक बात है।

फरवरी, 2014 में पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ऑन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की साइबर सिक्योरिटी पर एक रिपोर्ट आई थी और उसमें यह चेतावनी दी गई कि आधार कार्ड योजना न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता है, बल्कि नागरिकों की संप्रभुता एवं निजता के अधिकार पर हमला भी है। क्योंकि, जिस तरह से लोगों का बायोमीट्रिक डाटा क्लाउड टेक्नोलॉजी के तहत स्टोर किया जा रहा है, उस पर देश की सरकार का कोई अधिकार नहीं है। कोई उन्हें हैक करके हासिल कर लेता है, तो उसके खिलाफ भारत कुछ करने की स्थिति में नहीं होगा। पर उनका कोई अधिकार नहीं रह जाएगा।

जहां पहले ही कई पहचान पत्र हमारे पास मौजूद हैं वहां इस नए पहचान पत्र के आने से क्या होगा? ये हमारी निजता और स्वतंत्रता में घुसपैठ जैसा है। अगर हमें पता हो कि हमारे फोन और ईमेल की निगरानी की जा रही है तो हमें बातचीत करने के लिए दूसरे सुरक्षित तरीकों की तलाश करनी होगी। भारत में निजता संबंधी कोई कानून नहीं है। यानी आधार परियोजना एक तरह के कानूनी निर्वात में काम कर रही है।

तर्क दिया जा रहा है कि सामाजिक कल्याणकारी परियोजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए आधार जरूरी है. केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें भी आधार के पक्ष में यही तर्क देती रही हैं, लेकिन ये सच नहीं है| सामाजिक कल्याणकारी परियोजनाओं में आधार के बगैर ही भ्रष्टाचार में कमी आ रही है|

आज सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले ने यह साबित भी कर दिया की भ्रष्टाचार कम करने के लिए आधार की कोई आवश्यकता नहीं है|

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सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर दिया बड़ा फैसला, जानिए फैसले से जुड़ी ये ख़ास बातें...
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सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर दिया बड़ा फैसला, जानिए फैसले से जुड़ी ये ख़ास बातें...
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आधार की अनिवार्यता को लेकर बड़ा फैसला दिया है| देश की सबसे बड़ी अदालत ने कुछ शर्तों के साथ आधार को वैध किया है| वहीं दूसरी ओर आधार की संवैधानिकता के कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखी गई है|
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The Policy Times
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