तेलंगाना: दलित कार्यकर्ता डॉ. सुजाता एससी सीट के लिए उतरीं चुनावी मैदान में

इस साल पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में नए चेहरें और नए नाम चुनावी मैदान में उतर रहें है| विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र तेलंगाना में मनचैरियल जिले के चेनुर विधानसभा क्षेत्र से एससी सीट (अनुसूचित जाति) के लिए दलित कार्यकर्ता और सहयोगी प्रोफेसर डॉ. सुजाता सरेपल्ली मैदान में उतरेंगी|

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इस साल पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में नए चेहरें और नए नाम चुनावी मैदान में उतर रहें है| विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र तेलंगाना में मनचैरियल जिले के चेनुर विधानसभा क्षेत्र से एससी सीट (अनुसूचित जाति) के लिए दलित कार्यकर्ता और सहयोगी प्रोफेसर डॉ. सुजाता सरेपल्ली मैदान में उतरेंगी|

बता दें बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी) और बहुजन वाम मोर्चा (बीएलएफ) किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हुए हैं| हाल ही में बीएसपी ने ऐलान किया कि दलित समूह की सबसे लोकप्रिय कार्यकर्ता और विश्वविद्यालय के सहयोगी प्रोफेसर डॉ. सुजाता सरेपल्ली एससी सीट से चुनाव लड़ेंगी| बीएसपी के सूत्रों ने कहा कि डॉ. सुजाता के नाम की मंजूरी बसपा अध्यक्ष मायावती ने दी है|

साल 2014 के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सबसे लोकप्रिय पार्टी के रूप में उभरी थी | बसपा के तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष मंथापुरम बलियाह ने कहा कि आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में दलितों को मैदान में रखने के अलावा हम अनारक्षित सीटों से चुनाव लड़ने के लिए भी दलितों को टिकट देंगे क्योंकि हम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरे हैं। दलित राजनीतिक क्षेत्र में एक बड़ी जगह के लिए लड़ रहे हैं। वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग राजनीति और सरकार में उनका प्रतिनिधित्व करें|

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वहीँ, सीपीएम के राज्य सचिव तममिनेनी वीरभद्रम ने कहा कि बीएलएफदलितोंको प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा कि हमारा विचार दलितों को अनारक्षित सीटों से लड़ने के लिए प्रोत्साहित करना है| तेलंगाना में साल 2014 से करीब 23 हत्याएं जाति आधारित हुई हैं। यहां एक ब्राह्मणिक लहर भी है। उन्होंने कहा वर्ष 2014 की तुलना में आज दलितों के बीच अधिक जागरूकता आई है और बीएलएफ उनके सामजिक न्याय के मंच के रूप में हमेशा से प्रतिबद्ध रहा है|

बीएलएफ में महाजन समाजवादी पार्टी, बहुजन राज्यम पार्टी और दलित प्रजा मोर्चा जैसे दलित संगठन शामिल हैं। बीएसपी और बीएलएफ केवल एससी वोट को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहे हैं, जो राज्य की आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा है बल्कि 10 प्रतिशत एसटी वोट को भी लक्षित कर रहे हैं। हालांकि, कई दलित नेताओं की निराशा की वजह से बीएलएफ और बीएसपी वोटों को बांटने वाली गठबंधन सरकार नहीं बना सके।

बीएसपी नेता मंथापुरम बलियाह का कहना है कि एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में गठबंधन सरकार बनाने की बजाय अपने प्रतीक पर चुनाव लड़ेंगे। तेलंगाना में बसपा कीयूएसपी’ (USP) इसकी पहचान है जो अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करके खोया नहीं जा सकता है। हम सभी 119 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे|

दलितों के उत्थान के लिए मैदान में उतरी डॉ. सुजाता सरेपल्ली की प्रशंसा करते हुए बलियाह ने कहा कि इस क्षेत्र वह एक प्रसिद्ध कार्यकर्ता है| साथ ही उनमे महिलाओं से सबंधित मुद्दों के अलावा अन्य मुद्दों का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता है|

बता दें कि डॉ. सुजाता सरेपल्ली सारावाहन विश्वविद्यालय, करीमनगर में समाजशास्त्र विभाग की एक सहयोगी प्रोफेसर है। 46 वर्षीय डॉ. सुजाता दलित युवाओं और सामुदायिक मंडलों के बीच एक प्रतीक है क्योंकि जाति के भेदभाव और दलितों पर उत्पीड़न पर उनकी गहरी स्पष्टता है|

 

बीएसपी नेताओं का मानना है कि तेलंगाना के निर्माण के बाद सरकार हाशिए वाले समुदायों की रक्षा करने में विफल रही है। उनका मानना है कि इस राज्य के गठन के बाद सरकार सामंती बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार तेलंगाना राज्य के लिए एक साथ खड़ी है किन्तु जब दलित और हाशिए वाले समुदायों पर बढ़ते हमलों की बात आती है तब उनके साथ भेदभाव किया जाता है|

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इस साल पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में नए चेहरें और नए नाम चुनावी मैदान में उतर रहें है| विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र तेलंगाना में मनचैरियल जिले के चेनुर विधानसभा क्षेत्र से एससी सीट (अनुसूचित जाति) के लिए दलित कार्यकर्ता और सहयोगी प्रोफेसर डॉ. सुजाता सरेपल्ली मैदान में उतरेंगी|
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