इस बार 58 मंत्रियों ने शपथ ली, इनमें 19 नए चेहरे; 25 कैबिनेट, 9 स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्य मंत्री

गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में मोदी समेत 58 मंत्रियों ने शपथ ली, जबकि 2014 में 46 ने शपथ ली थी। अमित शाह पहली बार केंद्रीय मंत्री बने। शाह के मंत्री बनने के बाद संभावना जाहिर की जा रही है कि जगतप्रकाश नड्डा को भाजपा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। उन्होंने शपथ नहीं ली। मंत्रिमंडल में सबसे चौंकाने वाला चेहरा एस जयशंकर का है, जो तीन साल विदेश सचिव रह चुके हैं।

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  • लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 71 हो गई थी
  • इस बार कुल 6 महिला मंत्री; उत्तर प्रदेश के ठाठ, मंत्री बने आठ
  • स्मृति (43) सबसे युवा, पासवान (72) सबसे उम्रदराज; पासवान को छोड़कर सभी मंत्री आजादी के बाद जन्मे
  • जेपी नड्डा मंत्री नहीं बने, उनके भाजपा अध्यक्ष बनने की संभावना; मेनका, राज्यवर्धन, सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा बाहर
  • जदयू ने मंत्री पद ठुकराया, नीतीश ने कहा- सांकेतिक तौर पर सरकार में शामिल होने का कोई मतलब नहीं था

गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में मोदी समेत 58 मंत्रियों ने शपथ ली, जबकि 2014 में 46 ने शपथ ली थी। अमित शाह पहली बार केंद्रीय मंत्री बने। शाह के मंत्री बनने के बाद संभावना जाहिर की जा रही है कि जगतप्रकाश नड्डा को भाजपा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। उन्होंने शपथ नहीं ली। मंत्रिमंडल में सबसे चौंकाने वाला चेहरा एस जयशंकर का है, जो तीन साल विदेश सचिव रह चुके हैं। इस बार 25 कैबिनेट, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्य मंत्री बनाए गए। 19 नए चेहरों को जगह मिली। उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 8 सांसदों को मंत्री बनाया गया। सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, राज्यवर्धन राठौर, महेश शर्मा और सुरेश प्रभु को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। 53 मंत्री भाजपा के हैं और सहयोगी दलों के मंत्रियों की संख्या 4 है। इनमें जदयू और अपना दल शामिल नहीं हैं। 2014 में मंत्री बनाए गए राज्यवर्धन और मेनका समेत 36 को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया।

इन कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली

राजनाथ सिंह- लखनऊ (उप्र), अमित शाह- गांधी नगर (गुजरात), नितिन गडकरी- नागपुर (महाराष्ट्र), डीवी सदानंद गौड़ा- बेंगलुरु उत्तर (कर्नाटक), निर्मला सीतारमण- राज्यसभा सदस्य, रामविलास पासवान- चुनाव नहीं लड़ा, नरेंद्र सिंह तोमर- मुरैना (मप्र), रविशंकर प्रसाद- पटना साहिब (बिहार), हरसिमरत कौर बादल- बठिंडा (पंजाब), थावरचंद गहलोत- राज्यसभा सदस्य, एस जयशंकर- पूर्व विदेश सचिव, रमेश पोखरियाल निशंक- हरिद्वार (उत्तराखंड), अर्जुन मुंडा- खूंटी (झारखंड), स्मृति ईरानी- अमेठी (उप्र), हर्षवर्धन- चांदनी चौक (दिल्ली), प्रकाश जावड़ेकर- राज्यसभा सदस्य, पीयूष गोयल- राज्यसभा सदस्य, धर्मेंद्र प्रधान- राज्यसभा सदस्य, मुख्तार अब्बास नकवी- राज्यसभा सदस्य, प्रहलाद जोशी- धारवाड़ (कर्नाटक), महेंद्रनाथ पांडेय- चंदौली (उप्र), अरविंद सावंत- मुंबई दक्षिण (महाराष्ट्र), गिरिराज सिंह- बेगूसराय (बिहार), गजेंद्र सिंह शेखावत- जोधपुर (राजस्थान)

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

संतोष गंगवार- बरेली (उप्र), राव इंद्रजीत सिंह- गुड़गांव (हरियाणा), श्रीपद नाइक- उत्तर गोवा (गोवा), जितेंद्र सिंह- उधमपुर (जम्मू-कश्मीर), किरेन रिजिजू- अरुणाचल पश्चिम, प्रहलाद पटेल- दमोह (मप्र), आरके सिंह- आरा (बिहार), हरदीप पुरी- राज्यसभा सदस्य, मनसुख मांडविया- राज्यसभा सदस्य

राज्य मंत्र

फग्गन सिंह कुलस्ते- मंडला (मप्र), अश्विनी चौबे- बक्सर (बिहार), अर्जुन राम मेघवाल- बीकानेर (राजस्थान), वीके सिंह- गाजियाबाद (उप्र), कृष्णपाल गुर्जर- फरीदाबाद (हरियाणा), रावसाहेब दानवे- जालना (महाराष्ट्र), जी किशनरेड्डी -सिकंदराबाद (तेलंगाना), पुरुषोत्तम रुपाला -राज्यसभा सदस्य, रामदास आठवले- राज्यसभा सदस्य, साध्वी निरंजन ज्योति- फतेहपुर (उप्र), बाबुल सुप्रियो- आसनसोल (बंगाल), संजीव बालियान- मुजफ्फरनगर (उप्र), संजय धोत्रे- अकोला, महाराष्ट्र, अनुराग ठाकुर- हमीरपुर (हिमाचल), सुरेश अंगड़ी बेलगाम- कर्नाटक, नित्यानंद राय- उजियारपुर (बिहार), रतन लाल कटारिया- अंबाला (हरियाणा), वी मुरलीधरन- राज्यसभा सदस्य, रेणुका सिंह सरुता- सरगुजा (छत्तीसगढ़), सोम प्रकाश- होशियारपुर (पंजाब), रामेश्वर तेली- डिब्रूगढ़ (असम), प्रताप चंद्र सारंगी- बालासोर (ओडिशा), कैलाश चौधरी- बाड़मेर (राजस्थान), देबश्री चौधरी -रायगंज (बंगाल)

मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा कोटा 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश और 48 सीटों वाले महाराष्ट्र का रहा, जहां से 8-8 मंत्री बनाए गए। इसके बाद बिहार से 6, मप्र से 5, कर्नाटक से 4, गुजरात-हरियाणा-राजस्थान से 3-3 मंत्री बनाए गए। बंगाल-पंजाब-झारखंड से 2-2 मंत्री बनाए गए।

कैबिनेट में पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद वी मुरलीधरन, बंगाल के रायगंज से सांसद देबश्री चौधरी, सरगुजा (छत्तीसगढ़) से रेणुका सिंह सरुता, सिकंदराबाद (तेलंगाना) से चुने गए जी किशन रेड्डी चौंकाने वाले नाम हैं। इनके अलावा बालासोर (ओडिशा) से चुने गए प्रताप सारंगी भी मंत्री बनाए गए। उन्हें “ओडिशा का मोदी’ कहा जाता है, वे साइकिल से चलते हैं।

पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और वाणिज्य और नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु को इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिली। नड्डा को अमित शाह की जगह भाजपा अध्यक्ष बनाने की संभावना है। उधर, जदयू को एक मंत्री का प्रस्ताव मिलने के बाद नीतीश कुमार ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सांकेतिक तौर पर सरकार में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। वे पिछली बार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री थीं।

अरुणाचल पश्चिम सीट से दो बार के सांसद किरेन रिजिजू का दर्जा राज्यमंत्री से बढ़ाकर इस बार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कर दिया गया। गिरिराज सिंह को भी कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई, पिछली बार उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का दर्जा मिला था। गजेंद्र सिंह शेखावत को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया, पिछली बार वे राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार थे। महेंद्र नाथ पांडेय कैबिनेट बने, वे भी पिछली बार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार थे।

43 वर्षीय स्मृति ईरानी कैबिनेट में सबसे युवा हैं। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान (72) सबसे उम्रदराज हैं। इस बार 6 महिलाओं निर्मला सीतारमण, हरसिमरत कौर बादल, स्मृति ईरानी, साध्वी निरंजन ज्योति, रेणुका सिंह सरुता और देबश्री चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। पिछली सरकार में 9 महिलाएं मंत्री थीं।

समारोह में बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, भूटान के प्रधानमंत्री लोताय शेरिंग, म्यांमार के राष्ट्रपति यू विन मिंट, थाईलैंड की विशेष राजदूत ग्रीसदा बूनराच, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जीनबेकोव, मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ मौजूद थे।

इनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शपथ ग्रहण में मौजूद थे।

उद्योगपति मुकेश अंबानी पत्नी नीता अंबानी के साथ आए। इनके अलावा रतन टाटा, लक्ष्मी निवास मित्तल, गौतम अडानी भी समारोह में मौजूद थे। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन भी मौजूद थे। हेमामालिनी, सन्नी देओल, रजनीकांत, करण जौहर, शाहिद कपूर, बोनी कपूर, कंगना रानौत, सिद्धार्थ रॉय कपूर, विवेक ओबेरॉय, अनुपम खेर, मधुर भंडारकर, बोनी कपूर ने भी समारोह में शिरकत की। पुलावामा आतंकी हमले के शहीदों के परिजनों और बंगाल में हिंसा के दौरान मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों को भी समारोह में बुलाया गया था।

शपथ से पहले मोदी ने आज सुबह ही महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को उनके समाधि स्थल जाकर श्रद्धांजलि दी। वे शहीदों को नमन करने वॉर मेमोरियल भी पहुंचे। मोदी ने अटलजी को याद करते हुए ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा- मैं हर एक मौके पर प्यारे अटलजी को याद करता हूं। वे यह देखकर बहुत खुश होते कि भाजपा को लोगों की सेवा करने का इतना अच्छा मौका मिला। अटल जी के जीवन और कार्य से प्रेरित होकर, हम सुशासन बढ़ाने और जीवन को बदलने का प्रयास करेंगे।

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गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में मोदी समेत 58 मंत्रियों ने शपथ ली, जबकि 2014 में 46 ने शपथ ली थी। अमित शाह पहली बार केंद्रीय मंत्री बने। शाह के मंत्री बनने के बाद संभावना जाहिर की जा रही है कि जगतप्रकाश नड्डा को भाजपा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। उन्होंने शपथ नहीं ली। मंत्रिमंडल में सबसे चौंकाने वाला चेहरा एस जयशंकर का है, जो तीन साल विदेश सचिव रह चुके हैं।
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The Policy Times

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