शारदा चिट फण्ड घोटाले के 2 आरोपी आज बीजेपी में

साल 2013 के अप्रैल महीने में यह चर्चित चिटफंड घोटाला सामने आया था। कथित तौर पर यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपए का है। शारदा ग्रुप की कंपनियों पर लोगों से गलत ढंग से पैसे जुटाने का आरोप है जिन्हें बाद में वापस नहीं किया गया। इस घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सवाल उठे थे।

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Today join in BJP 2 accused of Sharada Chitfund scam
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में धरने पर बैठी हैं| सीबीआई अधिकारियों के कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचने के बाद से यह घमासान मचा हुआ है| ममता का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का दुरुपयोग कर विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है| ममता बनर्जी की अगुवाई वाले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जानबूझकर उन्हें निशाना बना रही है| उनका कहना है कि अगर केंद्र सरकार अगर इतनी निष्पक्ष है तो टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले शारदा चिट फंड घोटाले के आरोपी मुकुल रॉय और असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ जांच क्यों नहीं हो रही है? उन्हों ने पूछा के सीबीआई रफाल घोटाला और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के खिलाफ क्यों जांच नहीं कर रही है?

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चिटफंड घोटाला क्या है

साल 2013 के अप्रैल महीने में यह चर्चित चिटफंड घोटाला सामने आया था। कथित तौर पर यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपए का है। शारदा ग्रुप की कंपनियों पर लोगों से गलत ढंग से पैसे जुटाने का आरोप है जिन्हें बाद में वापस नहीं किया गया। इस घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सवाल उठे थे।

शारदा स्कैम पश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी की पार्टी पर लगा करीब 5 से 6 साल पुराना दाग है जिसे वो और उनकी पार्टी आज भी नहीं धो पाई है। ये राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटाले के तौर पर जाना जाता है। चिटफंड में घोटाला सामने आने के बाद टीएमसी के कई बड़े नेताओं का नाम जुड़ा। इस कंपनी पर आरोप लगाए गए हैं कि पैसे ठगने के लिए लोगों से लुभावने वादे किए थे और पैसे को 34 गुना करके वापस करने के लिए कहा गया था।

यह घोटाला इतना बड़ा था कि इसमें 40 हजार करोड़ की हेरा- फेरी की गई थी। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए सीबीआई से कहा था कि वो इस मामले की जांच करे। साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस से कहा था कि वो भी जांच में सहयोग दें।

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क्या है चिटफंड स्कीम

चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए। साथ ही जो शख्स इसमें बोली लगाता है उसे पैसे भी लौटाने होते है।

नियम कहते है कि ये स्किम किसी संस्था या फिर किसी व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है लेकिन अब चिट फंड के स्थान पर सामूहिक सार्वजनिक जमा या सामूहिक निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं।

रोज वैली घोटाला

रोज वैली घोटाले पर काफी वक्त से हड़कंप मचा हुआ है| इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है| रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर चूना लगाने वाले इस समूह के पैर राजनीति, रियल एस्टेट और फिल्म जगत तक पसरे हुए थे| दरअसल, रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था| आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया| जिसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया| ग्रुप एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं|

रोज वैली और शारदा चिटफंड मामले में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए सीबीआई उनकी तलाश कर रही है| सीबीआई सूत्रों का कहना है कि चिटफंड मामले में राजीव कुमार शक के घेरे में हैं| पूछताछ के लिए उन्होंने कुमार को दो बार समन भी भेजा, लेकिन वो जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं|

राजीव कुमार कैसे जुड़े इस मामले से

इन चिटफंड घोटालों की जांच करने वाली पश्चिम बंगाल पुलिस की SIT टीम का नेतृत्व 2013 में राजीव कुमार ने किया था।रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीआई सूत्रों का कहना है कि एसआईटी जांच के दौरान कुछ खास लोगों को बचाने के लिए घोटालों से जुड़े कुछ अहम सबूतों के साथ या तो छेड़छाड़ हुई थी या फिर उन्हें गायब कर दिया गया था। इसी सिलसिले में सीबीआई कुमार से पूछताछ करना चाहती है।

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साल 2013 के अप्रैल महीने में यह चर्चित चिटफंड घोटाला सामने आया था। कथित तौर पर यह घोटाला तीन हजार करोड़ रुपए का है। शारदा ग्रुप की कंपनियों पर लोगों से गलत ढंग से पैसे जुटाने का आरोप है जिन्हें बाद में वापस नहीं किया गया। इस घोटाले में पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सवाल उठे थे।
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THE POLICY TIMES