उज्जवला योजना की खुली पोल, 85 फीसदी लाभार्थी आज भी चूल्हे पर खाना पकाने को मजबूर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है| बता दें कि उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की गयी थी| इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मुफ्त में गैस सिलेंडर, रेगुलेटर और पाइप देना था| सरकारी आंकड़ों की मानें तो इस योजना के तहत छह करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान दिये गये हैं| उज्ज्वला योजना के सिर्फ प्रचार में 150-200 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है बीजेपी सरकार

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Highlights:

  •    पीएम मोदी ने उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की थी
  •    8 करोड़ BPL परिवारों को मुफ्त में गैस सिलेंडर, रेगुलेटर और पाइप देना का था वादा
  •    सरकारी आंकड़ों की मानें तो छह करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन दिये गये
  •    RICE के ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 85 फीसदी लाभार्थी अभी भी चूल्हे पर खाना बना रहे हैं
  •    रिपोर्ट की माने तो तीन लाख 18 हजार परिवारों में एक भी महिला नहीं है

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है| बता दें कि उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की गयी थी| इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मुफ्त में गैस सिलेंडर, रेगुलेटर और पाइप देना था| सरकारी आंकड़ों की मानें तो इस योजना के तहत छह करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान दिये गये हैं| उज्ज्वला योजना के सिर्फ प्रचार में 150-200 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है बीजेपी सरकार

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जाने माने अंग्रेजी अख़बार द हिंदू अखबार में छपी एक खबर कहती है कि इस योजना के तहत मुफ्त एलपीजी रसोई गैस का कनेक्शन पाने वाले चार राज्यों के करीब 85 फीसदी लाभार्थी चूल्हे पर खाना बनाने को विवश हैं| बता दें कि रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कम्पैसनेट इकोनॉमिक्स  की नयी स्टडी में सामने आया है कि बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में उज्ज्वला योजना के 85 फीसदी लाभार्थी अभी भी चूल्हे पर खाना बना रहे हैं|

इसके पीछे के कारण आर्थिक हैं, साथ ही लैंगिक असमानता की बात सामने आयी है| परिणाम स्वरूप चूल्हे पर खाना बनाने के कारण इसके धुएं से नवजातों की मौत, बाल विकास में बाधा के साथ ही दिल व फेफड़े की बीमारियों का आशंका बलवती है, जान लें कि यह सर्वे 2018 के अंत में किया गया है| इसमें चार राज्यों के 11 जिलों के 1550 परिवारों का रैंडम सैंपल लिया गया|

इन परिवारों में से 98 फीसदी से अधिक के घर में चूल्हे थे, सर्वे में सामने आया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के अति गरीब होने के कारण सिलेंडर को रिफिल कराना बड़ी समस्या है| ऐसे में सिलेंडर खाली होने पर वे तुरंत इसे भरवाने कि स्थिति में नहीं होते हैं| इसमें लैंगिक असमानता की भूमिका सामने आयी है|

जलावन का मुफ्त में उपलब्ध होना एलपीजी का प्रयोग करने में बड़ी बाधा

सर्वे में पाया गया कि लगभग 70 फीसदी परिवारों को चूल्हे के जलावन पर कोई खर्च नहीं करना पड़ता है| इसका मतलब है कि यह सिलेंडर के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है| महिलाएं गोबर के उपले पाथती हैं, जबकि पुरुष लकड़ियां काट कर लाते हैं| ऐसे में जलावन का मुफ्त में उपलब्ध होना भी एलपीजी का प्रयोग करने में बड़ी बाधा है|

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सर्वे में अधिकतर लोगों ने माना कि गैस स्टोव पर खाना बनाना आसान है लेकिन उन्होंने माना कि चूल्हे पर खाना अच्छा पकता है, विशेषकर रोटियां|  रिपोर्ट में यह बात भी सामने आयी कि लोगों के बीच एक आम धारणा है कि गैस चूल्हे पर बने खाने से पेट में गैस बनती है| ऐसे में उज्ज्वला योजना को लेकर जागरुकता बढ़ाने पर जोर देने की बात कही गयी|

भारत के तीन लाख परिवारों में महिला नहीं

इस रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों में के 29 लाख तीन हजार 131 परिवारों में से तीन लाख 18 हजार 61 परिवारों में एक भी महिला नहीं है। सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण 2011 से निकल कर आए इन आंकड़ों के बाद संबंधित परिवारों को इस योजना से जोडऩे के मसले पर सरकार को सोचना चाहिए ताकि मौतों को रोका जा सके|

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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है| बता दें कि उज्ज्वला योजना साल 2016 में शुरू की गयी थी| इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को मुफ्त में गैस सिलेंडर, रेगुलेटर और पाइप देना था| सरकारी आंकड़ों की मानें तो इस योजना के तहत छह करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान दिये गये हैं| उज्ज्वला योजना के सिर्फ प्रचार में 150-200 करोड़ रूपये खर्च कर चुकी है बीजेपी सरकार
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The Policy Times