साल 2020 तक भारत के 21 बड़े शहरों में भूमिगत जल ख़त्म होने की कगार पर

आंकड़े बताते हैं कि देश में साठ करोड़ लोग यानी क़रीब आधी आबादी उन इलाकों में रहती है जहां पानी की भारी समस्या है| भूमिगत जल का दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल भारत में होता है यानी जितने भूमिगत जल का इस्तेमाल पूरी दुनिया करती है उसका 24 फीसदी अकेले हम करते हैं|

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Water crisis
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भारत में जल संकट एक बड़ी समस्या बनती जा रही है| नीति आयोग के मुताबिक, साल 2020 तक देश में 21 बड़े शहरों में भूमिगत जल लगभग ख़त्म हो जाएगा| आंकड़े बताते हैं कि देश में साठ करोड़ लोग यानी क़रीब आधी आबादी उन इलाकों में रहती है जहां पानी की भारी समस्या है| भूमिगत जल का दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल भारत में होता है यानी जितने भूमिगत जल का इस्तेमाल पूरी दुनिया करती है उसका 24 फीसदी अकेले हम करते हैं| यही वजह है कि 2000 से 2010 के बीच भारत में भूमिगत जल में गिरावट की दर 23% रही जो उसके अगले दशक में और भी ज़्यादा हो सकती है| आज देश भर में जल संकट को लेकर हाहाकार मचा हुआ है जिसमें चेन्नई पानी की भयानक मार इन दिनों झेल रहा है| ये वही चेन्नई है जहां 2015 में भयानक बाढ़ आई थी|

पेय जल की समस्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेन्स फंड के रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दुनियाभर में 2.2 अरब लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा है| वहीं, 4.2 अरब लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित स्वच्छता सेवाएं (शौचालय की सुविधा) भी नहीं मिल रही हैं| इसके अलावा दुनियाभर में करीब तीन अरब लोगों को बुनियादी हाथ धोने की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है|

‘प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वॉटर, सैनिटेशन एंड हाईजीन, 2000-2017, स्पेशल फोकस ऑन इनइक्वेलिटीज’ नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2000 के बाद से 1.8 अरब लोगों को बुनियादी पेयजल सेवा मिली है| मगर, लोगों तक पानी की पहुंच, उपलब्धता और इन सेवाओं की गुणवत्ता में भारी असमानताएं हैं|

इस रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि खुले में शौच करने वाली आबादी का हिस्सा सदी के अंत के बाद 21 फीसद से घटकर 9 फीसद हो गया है| हर साल 5 साल से कम उम्र के लगभग 2.97 लाख बच्चे अपर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वच्छता सेवाओं की कमी के चलते दस्त से मर जाते हैं| स्वच्छता की खराब हालत और दूषित पानी से हैजा, पेचिस, हेपेटाइटिस ए और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने में मदद मिलती है|

जल संकट की बढती समस्या पर यूनिसेफ की एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ वॉटर, सैनिटेशन एंड हाईजीन केली एन नायलर ने कहा कि सिर्फ पानी की पहुंच पर्याप्त नहीं है| यदि पानी साफ नहीं है या बहुत दूर है तो यह पीने के लिए सुरक्षित नहीं है| यदि शौचालय का उपयोग असुरक्षित या सीमित है तो हम दुनिया के बच्चों के लिए काम नहीं कर रहे हैं|

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि गरीब और ग्रामीण समुदायों में बच्चों और उनके परिवारों के सबसे पीछे छूट जाने का खतरा है| नाइलर ने दुनिया भर की सरकारों से अपने समुदायों में निवेश करने का आग्रह किया है| उन्होंने कहा कि यदि हम इन आर्थिक और भौगोलिक विभाजन को पाटने जा रहे हैं तो इस आवश्यक मानवाधिकार को वितरित कर सकेंगे|

क्या है कारण?

बढ़ते जल संकट की वजह क्या है यह जानना ज़रूरी है| जल की बढती समस्या को सबसे बड़ा कारण जो सामने आता है वह है देश की बढती आबादी| इससे प्रति व्यक्ति साफ पानी की उपलब्धता घट रही है| फिलहाल देश में प्रति व्यक्ति 1000 घनमीटर पानी उपलब्ध है जो वर्ष 1951 में 3-4 हजार घनमीटर था| 1700 घनमीटर प्रति व्यक्ति से कम उपलब्धता को संकट माना जाता है| अमेरिका में यह आंकड़ा प्रति व्यक्ति आठ हजार घनमीटर है|

वहीँ जल संकट दूसरी बड़ी वजह जल प्रदुषण है क्यूंकि जहाँ पानी उपलब्ध है उसकी क्वालिटी भी बेहद खराब है| देश में नदियों की कमी नहीं है लेकिन बावजूद इसके आज भारत जल संकट के दौर से गुज़र रहा है| स्थति यह बन चुकी है कि ज्यादातर नदियों का पानी पीने लायक और कई जगह नहाने लायक तक नहीं है|

वर्ष 1984 में गंगा को साफ करने के लिए शुरू ‘गंगा एक्शन प्लान’ बनाया गया था, इसके बावजूद आज गंगा नदी सबसे प्रदूषित नदियों की लिस्ट में है| इसके अलावा खेती पर निर्भर देश के किसान सिंचाई के लिए मनमाने तरीके से भूगर्भीय पानी का दोहन करते हैं जिससे  जलस्तर तेजी से घट रहा है| कुछ ऐसी ही हालत शहरों में भी हैं जहां तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल जमीन के भीतर स्थित पानी के भंडार पर दबाव बढ़ा रहे हैं|

कैसे दूर हो सकता है जल संकट

बढ़ते जल संकट की समस्या पर अंकुश लगाना बेहद ज़रूरी बन चूका है| अन्तरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान बैंकॉक की रिपोर्ट बताती है कि देश के अनेक हिस्से वर्ष 2025 तक जलाभाव की गिरफ्त में होंगे| यह जलाभाव देश में खाद्यान्न संकट पैदा करेगा, उद्योगों को खत्म कर देगा, पलायन, बेरोजगारी और आपसी संघर्ष को बढ़ाएगा जिससे देश की अर्थव्यवस्था टूट सकती है जो बेहद चिंताजनक है|

पानी की समस्या को एक ठोस योजना और निति के तहत कम की जा सकती है| इसके साथ ही अत्यधिक जल दोहन रोकने के लिये कड़े कानून बनाए जाएं, जिसमें सजा का प्रावधान हो| इसके अलावा प्रदूषित नदियों की संख्या बढती जा रही है, अगर इसके उचित रोकथाम के उपाय निकाले जाए तो नदियों के पानी को नहाने और पीने योग्य बनाया जा सकता है| तेजी से बढ़ती आबादी भी एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रही है जिसको जनसख्या नियंत्रण के तहत नियंत्रित किया जा सकता है|

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आंकड़े बताते हैं कि देश में साठ करोड़ लोग यानी क़रीब आधी आबादी उन इलाकों में रहती है जहां पानी की भारी समस्या है| भूमिगत जल का दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल भारत में होता है यानी जितने भूमिगत जल का इस्तेमाल पूरी दुनिया करती है उसका 24 फीसदी अकेले हम करते हैं|
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The Policy Times