विश्व एड्स दिवस: क्या है भारत का हाल ?

0
0

हर साल 1 दिसंबर को दुनियाभर में ‘विश्व एड्स दिवस’ मनाया जाता है| इसकी शुरुआत 1 दिसम्बर 1988 में हुई थी जिसका मकसद इस बिमारी से ग्रसित व्यक्तियों की मदद करना है| इस दिन को एड्स जैसे गंभीर बिमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जाता है|

इस बीमारी को AIDS नाम सन 1982 में मिला था| अमेरिकन हेल्थ और ह्यूमन विभाग ने 29 अप्रैल 1984 को AIDS के कारण के तौर पर ‘रेट्रोवायरस’ जिसे बाद में HIV (Human Immunodeficiency Virus) नाम दिया गया| विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी का पहला केस 1981 में सामने आया था जिसमे अब तक करीब 39 मिलियन लोग इस बीमारी का शिकार हो चुके हैं| इतने लंबे अरसे के दौरान होने वाले वैज्ञानिक खोजों, सालों से चल रहे रिसर्च और सारी दुनिया में इसके लिए आई जागरुकता के बावजूद इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है|

क्या कहते है आकड़े

यूनाईटेड नेशन (संयुक्त राष्ट्र) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-पेसिफिक रीजन में पाए जाने वाले कुल HIV के मरीजों के 40 प्रतिशत मरीज भारत में होते हैं| एशिया-पेसिफिक रीजन के कुल मरीजों में से 90 प्रतिशत लोग भारत, चीन, इंडोनीजिया, म्यांमार, थाइलैंड और विएतनाम में रहते हैं|  भारत में HIV इंफेक्शन के नए मामलों में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है पर फिर भी यहां नए मरीज का प्रतिशत एशिया-पेसिफिक रीजने में पनपने वाले नए मामलों का 38 प्रतिशत है| भारत में HIV के करीब 64 प्रतिशत मरीजों को एंटीरेट्रोवियल थेरेपी से इलाज नहीं मिल पाता| भारत में एड्स से होने वाली मौतों में 2005 और 2013 के बीच 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है| इस दौरान HIV के इलाज की उपलब्धता में वृद्धि दर्ज की गई थी|

गुरूवार को जारी हुई यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 2017 में अनुमानित 120,000 बच्चे और किशोरावस्था एचआईवी से संक्रमित थे| इसके बाद पाकिस्तान का स्थान आता है जिसमे मरीजों की संख्या 5,800 थी| वहीँ, नेपाल (1,600) और बांग्लादेश (1,000 से कम) स्थान है| रिपोर्ट में पाया गया कि साल 2017 में एचआईवी के साथ निदान किए गए 5 साल से कम उम्र के बच्चों की अनुमानित संख्या 2010 में तुलनीय अनुमान से 43% कम थी| एचआईवी से ग्रसित 0-14 आयु वर्ग के अनुमानित हिस्से को लाइफसाइविंग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) पर शुरू किया गया था जो 2010 से लगभग 50 प्रतिशत अंक था वहीँ, 2017 में 73% था| हालांकि, रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि भारत संक्रमण को रोकने में तेजी से प्रगति नहीं करता तो भारत में 2030 तक लगभग हर दिन 80 किशोर एड्स की वजह से मारे जाएंगे|

यूनिसेफ की मौजूदा डेटा बताता है कि पिछले आठ सालों में मां-से-बच्चे संक्रमण की संख्या में लगभग 40% की गिरावट आई है लेकिन लड़कियां अभी भी सभी किशोर एचआईवी संक्रमणों के दो-तिहाई हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं और बड़े बच्चों के बीच संक्रमण की दर में गिरावट सबसे धीमी है| इसके अलावा, रिपोर्ट में 2030 से 1.4 मिलियन तक एचआईवी संक्रमित बच्चों की संख्या में वैश्विक लक्ष्य में कटौती का हवाला दिया गया है जबकि अनुमानित संख्या आज 1.9 मिलियन है जो दर्शाती है कि दुनिया लगभग 500,000 तक ऑफ-ट्रैक है| वर्तमान में दुनिया भर में एचआईवी से संक्रमित 19 साल तक के तीन मिलियन लोग हैं| यदि एचआईवी रोकथाम, देखभाल और उपचार सेवा, परीक्षण और निदान के लिए पर्याप्त पहुंच प्रदान की जाए तो वैश्विक स्तर पर दो मिलियन नए संक्रमणों को रोका जा सकता है|