ऑटो इंडस्ट्री में मंदी की मार, ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में 10 लाख नौकरियां जाने का खतरा

पैसेंजर गाड़ियों में इस साल जुलाई तक 19 साल में सबसे बड़ी गिरावट हुई है। पिछले साल जुलाई की तुलना में इस साल जुलाई में कारों की बिक्री 35.95 फ़ीसदी गिरी है।

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  • जुलाई में वाहनों की घरेलू बिक्री71% घटी, दिसंबर 2000 के बाद सबसे तेज गिरावट।
  • मारुति, होंडा और टाटा जैसी कंपनियों की सेल में 6 महीने में 15% से 44% की गिरावट।
  • फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन का दावामंदी की वजह से 2 लाख लोग नौकरी खो चुके।
  • फोर्ड इंडिया के प्रेसिडेंट अनुराग मेहरोत्रा ने भास्कर ऐप को बतायासरकार ने दखल नहीं दिया तो हालात और बिगड़ेंगे।
  • टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के डिप्टी एमडी एन राजा के मुताबिक, सरकार बैंकों को पूंजी देकर लिक्विडिटी बढ़ाए।

ऑटो इंडस्ट्री अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। गाड़ियों की बिक्री में गिरावट आई है। लगातार गाड़ियों की बिक्री गिरती जा रही है। पहली बार सियाम- यानी सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स ने आधिकारिक तौर पर माना है कि करीब साढ़े तीन लाख अस्थायी और कैजुअल नौकरियां जा चुकी हैं, और दस लाख लोगों की नौकरी ख़तरे में है।

आकड़ों के अनुसार पैसेंजर गाड़ियों में इस साल जुलाई तक 19 साल में सबसे बड़ी गिरावट है। पिछले साल जुलाई की तुलना में इस साल जुलाई में कारों की बिक्री 35.95 फ़ीसदी गिरी है। वहीं कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री 37.48 फ़ीसदी घटी है। सभी तरह के यात्री वाहनों की बिक्री 30.98% घटी है जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री 16.82 % घटी है।

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटमोबाइल मैन्युफ़ैक्चरर्स के मुताबिक देश में सभी तरह के वाहनों की बिक्री घटती जा रही है। ऑटो कंपनियों की इनवेन्टरी बढ़ती जा रही है जिस वजह से उन्हें प्रोडक्शन भी घटाना पड़ रहा है जिस वजह से अब तक करीब 3, 45,000 के करीब कॉन्ट्रैक्ट और कैजुअल पर काम कर रहे इस क्षेत्र के लोगो की नौकरियां जा चुकी हैं। अगर संकट जल्दी दूर नहीं हुआ तो इसका दायरा और बढ़ता जाएगा और दस लाख लोगों की नौकरियां खतरे में आ सकती हैं।

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा कि ऑटो मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में पिछले दो से तीन महीनों में करीब 15,000 नौकरियां जा चुकी हैं। इसमें अधिकतर नौकरियां अस्थायी या संविदा कर्मचारियों की थीं। इसके अलावा ऑटो कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10 लाख से अधिक नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।

माथुर ने कहा कि गिरती बिक्री के कारण करीब 300 डीलर अपने स्टोर बंद करने पर मजबूर हैं जिसके चलते करीब दो लाख नौकरियां जा सकती हैं। वाहन क्षेत्र के मौजूदा कठिन हालत के बारे में माथुर ने कहा कि इससे पहले क्षेत्र ने ऐसा दौर 2008-09 और 2013-14 के दौरान देखा था। माथुर के मुताबिक इस सभी कैटेगरी में जुलाई में गिरावट दर्ज की गई है।

माथुर ने कहा कि उन्हें सरकार से राहत पैकेज मिलने की उम्मीद है। यह अभी साफ नहीं है कि सरकार किस तरह से राहत दे सकती है। ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार से वाहनों पर जीएसटी दरों में कटौती करने और पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने की नीति लाने के लिए कहा है। ऑटो इंडस्ट्री का कहना है कि सरकार की तरफ से गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों का रिवाइवल किया जाए क्योंकि ऑटो सेल्स बहुत हद तक फाइनेंस की उपलब्धता पर निर्भर करती है। सरकार वाहनों के रजिस्ट्रेशन शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि को भी फिलहाल टाल दे।

विष्णु माथुर ने कहा कि यदि ऑटो इंडस्ट्री की वृद्धि नीचे जाती है तो जीडीपी ग्रोथ रेट भी गिरेगी। मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में ऑटो सेक्टर का योगदान करीब आधे के बराबर है। ऑटो सेक्टर में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर 3.7 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है।

देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया की बिक्री जुलाई में 36.71 फीसदी गिरकर 96,478 रही है। हुंडई की बिक्री 10.28 फीसदी की गिरावट के साथ 39,010 रह गई। वहीं, टू-व्हीलर्स की सबसे बड़ी कंपनी हीरो मोटो कॉर्प की बिक्री भी जुलाई में 22.9 फीसदी गिरकर वाहन 5, 11,374 रह गई है।

 

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ऑटो इंडस्ट्री में मंदी की मार, ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में 10 लाख नौकरियां जाने का खतरा
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पैसेंजर गाड़ियों में इस साल जुलाई तक 19 साल में सबसे बड़ी गिरावट हुई है। पिछले साल जुलाई की तुलना में इस साल जुलाई में कारों की बिक्री 35.95 फ़ीसदी गिरी है।
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The Policy Times